रांची. झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों की 90 फीसदी आबादी की पेयजल की आपूर्ति का एकमात्र साधन 4.04 लाख चापाकल है. यह चापानलों के अतिरिक्त राज्य में 6.89 लाख घरों में ही नल जल कनेक्शन के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है.
परंतु विगत एक वर्ष से चापानलों की मरम्मति में सरकार द्वारा आवंटन उपलब्ध नहीं कराने के कारण आमजनों को भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है.
हालांकि सरकार का कहना है चापानलों की मरम्मति के लिए सभी पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडलों को वित्तीय वर्ष 2019-20 में समेकित रूप से 14.21 करोड़ तथा 2020-21 के लिए 18.23 करोड़ रुपये का आवंटन दिया गया.
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सभी प्रमंडलों को मरम्मति कार्यां के लिए आवंटन दिये जाने के बाद चापाकलों की मरम्मति के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है, ताकि राज्य की ग्रामीण जनता को पेयजल से संबंधित किसी प्रकार की समस्या न हो. साथ ही इस क्रम में आगामी ग्रीष्म ऋतु को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा उक्त कार्यों के सतत अनुश्रवण के लिए सभी प्रमंडलों के साथ-साथ राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष की स्थापना किया गया है तथा प्रत्येक प्रखंड के लिए नोडल पदाधिकारी भी बनाया गया है. इधर, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने झारखंड 12 राज्यों में आर्सेनिक प्रभावित इलाकों के हैंडपंप बंद करने का नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश के बाद राज्य सरकार द्वारा आदेश निर्गत किया गया है. पेयजल स्वच्छता विभाग की ओर से यह जानकारी दी गयी है कि आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में हैंडपंप जिसमें आर्सेनिक की मात्रा क्षमता से अधिक रहता है,वैसे हैंडपंप के वाटर टैंक को लाल रंग दिया जाता है, ताकि उसके पानी का उपयोग पीने एवं खाना बनाने में न करके अन्य कार्यां में किया जा सके.
साहेबगंज जिला अंतर्गत प्रखंड साहेबगंज, राजमहल एवं उधवा का आंशिक भाग जो गंगा नदी के किनारे अवस्थित ग्रामों में कुछ टोलों में आर्सेनिक पायी गयी है. साहेबगंज में 5 टोलों में आर्सेनिक रिमुवल प्लांट आधारित मिनी ग्रामीण जलापूर्ति योजना द्वारा शुद्ध पेयजल उपलब्ध करायी जा रही है. राजमहल एवं उधवा प्रखंड में गुणवत्ता प्रभावित टोलों में मेगा पाईप जलापूर्ति योजना द्वारा ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया करायी जा रही है.
जल जीवन के तहत हर घर में कार्यरत घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से सभी घरों में जलापूर्ति से आच्छादित किया जाना है. यदि किसी टोलों में आर्सेनिक की मात्रा पायी जाती है, तो वैसे टोलों में आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करते हुए कार्यरत घरेलू नल कनेक्शन द्वारा पेयजलापूर्ति मुहैया करायी जाएगी.
विभाग की ओर से यह जानकारी दी गयी है कि आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में जल जांच के अनुसार प्रभावित चापाकलों को चिह्नित किया गया है. उन चापाकलों को लाल रंग से रंगकर लोगों को उक्त चापाकल के पानी का उपयोग नहीं करते के लिए जागरूक किया गया है. साहेबगंज जिला अंतर्गत राजमहल एवं उधवा का आंशिक भाग जो आर्सेनिक से प्रभावित हैं, वहां सतही जल स्रोत आधारित जलापूर्ति योजना का निर्माण कर लगभग 8000 कार्यरत गृह जल संयोजन के माध्यम से जलापूर्ति दी जा रही है. वहीं साहेबगंज प्रखंड में अल्पकालीन व्यवस्था के तहत आर्सेनिक प्रभावित स्रोतों में आर्सेनिक रिमुवल संयंत्र लगातार पेयजलापूर्ति दी जा रही है. दीर्घाकालीन स्थायी व्यवस्था के लिए सतही स्रोत गंगा नदी आधारित मेगा पाईप जलापूर्ति योजना का शेष कार्य पूर्ण करने के लिए पुनरीक्षित प्राक्कलन तैयार कर 20 मार्च 2021 तक समर्पित की जाएगी.

