राँची: मेयर आशा लकड़ा ने बस मालिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने राज्य में अंतर जिला यात्री बसों का परिचालन कर यात्रियों को राहत देने का काम किया है. कोरोना संक्रमण को देखते हुए वे केंद्र और राज्य सरकार के गाइडलाइन का भी पालन कर रहे हैं. परंतु सीटों की संख्या आधा किए जाने से यात्रियों के ऊपर आर्थिक बोझ पड़ रहा है. उन्हें एक सीट की जगह दो सीटों के किराए का भुगतान करना पड़ रहा है. पिछले पांच महीने से मध्यम वर्ग के लोग आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. ऐसे में मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है. बसों से यात्रा करने वालों में अधिकांशतः मध्यम वर्ग के लोग ही शामिल होते हैं.
आशा लकड़ा ने कहा कि राज्य सरकार ने बसों के परिचालन की घोषणा तो कर दी, लेकिन राज्य के विभिन्न जिलों तक आवागमन को सुगम बनाने के दृष्टिकोण से यात्री किराया का निर्धारण नहीं किया गया. बस मालिकों ने स्वयं यात्रियों के किराया का निर्धारण कर दिया. यदि राज्य सरकार व प्रशासनिक अधिकारी बस मालिकों के साथ बैठक कर यात्री किराया का निर्धारण करते तो बसों में यात्रियों की संख्या पर्याप्त होती.
उन्होंने कहा कि दोगुना यात्री किराया के कारण लोग बस से सफर करने से परहेज कर रहे है. हालात ऐसे ही रहे तो बसों का परिचालन शुरू करने के बाद भी बस मालिकों को व्यावसायिक दृष्टिकोण से घाटा ही होगा. एक ओर राज्य सरकार बस मालिकों को टैक्स भुगतान में राहत देने की घोषणा कर रही है, वहीं दूसरी ओर आम लोगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है.
मेयर ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि लॉकडाउन से पूर्व निर्धारित यात्री किराया को लागू कर बस से सफर करने वाले यात्रियों को राहत दी जाए और बस मालिकों को अतिरिक्त सीट का यात्री किराया या डीजल पर किए जाने वाले खर्च की भरपाई की जाए. कोरोना काल में मध्यम वर्ग के लोग अपने वर्तमान और भविष्य को लेकर चिंतित है. किसी की नौकरी चली गई तो किसी का रोजगार खत्म हो चुका है. ऐसे में उनके समक्ष परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पहली प्राथमिकता है. राज्य सरकार को किसी भी मामले में जनहित को देखते हुए फैसला लेना चाहिए, न कि जनहित की अनदेखी कर कोई भी निर्णय लेना चाहिए.

