ब्यूरो चीफ,
रांची: झारखंड के 80 हजार आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका का आंदोलन फिलहाल समाप्त हो गया है. राज्य सरकार का कहना है कि इनकी अधिकतर मांगों को मान लिया गया है. 43 दिनों से अनवरत चल रहा आंदोलन फिलहाल थम गया है. सरकार का कहना है कि केंद्र के नियमों के तहत ही सेविका, सहायिका को मानदेय दिया जा रहा है, सिर्फ मानदेय बढ़ाने की मांग का मामला फंसा हुआ है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सेविका और सहायिका की मांगों पर सरकार की तरफ से सहानुभूति पूर्वक विचार करने के लिए विकास आयुक्त सुखदेव सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी भी गठित कर दी है. कमेटी में महिला और बाल विकास विभाग के सचिव अमिताभ कौशल और वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव केके खंडेलवाल शामिल हैं. समिति की बैठक 30 सितंबर को होगी, जिसमें आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका की न्यायसंगत मांगों पर विचार कर फैसला लिये जाने की संभावना है.
केंद्र के अनुरूप मिल रहा मानदेय
झारखंड में आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका को केंद्र के नियमो के अनुरूप मानदेय दिया जा रहा है. महिला और बाल विकास विभाग की तरफ से दी गयी जानकारी के अनुसार सेविका को 45 सौ रुपये और सहायिका को 3550 रुपये दिये जा रहे हैं. आंगनबाड़ी सेविका को 45 सौ के अलावा राज्य सरकार अपने कोटे से 14 सौ रुपये और दे रही है, यानी प्रत्येक सेविका को 59 सौ रुपये मानदेय दिया जा रहा है. इसमें केंद्र से 27 सौ रुपये मिल रहे हैं. सेविका के मानदेय के लिए केंद्र से 2250 रुपये का अनुदान झारखंड को मिल रहा है.

