ब्यूरो चीफ,
रांची: झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (जेएससीए) के पदधारियों पर न्यायालय का आदेश भी मान्य नहीं होता है. विभिन्न न्यायालयों के आदेश का अनुपालन भी जेएससीए की तरफ से नहीं किया जाता है. इतना ही नहीं झारखंड सरकार के निबंधन विभाग के महानिबंधक के आदेशों पर भी अमल करना जरूरी नहीं समझा जाता है. जेएससीए का एक मामला यह भी है कि यहां पर होनेवाले क्रिकेट मैच में अत्यधिक टिकटों की प्रिंटिंग करा कर उसका गलत उपयोग और पैसा अर्जित किये जाने की बातें भी सामने आयी है. स्टेडियम में सीटिंग कैपेसिटी 40 से 45 हजार है. हर मैच में इससे अधिक टिकटें छपवायी गयीं. प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी अरविंद कुमार की अदालत ने 1477/2016 ने सात जुलाई 2017 को आदेश दिया था कि जेएससीए के आरोपी पदधारियों के खिलाफ 420 और 120 बी के तहत सम्मन जारी करते हुए कार्रवाई की जाये पर आरोपी संजय सिंह, राजेश वर्मा उर्फ बॉबी और एक अन्य पर प्रथम दृष्टया अपराध साबित होने पर भी कार्रवाई नहीं हुई.
भारतीय डाक के गलत मोहर का किया गया धड़ल्ले से उपयोग
अदालत में इस बात की शिकायत की गयी थी कि जेएससीए के जो भी सदस्य प्रबंध समिति के गलत कार्यों में सहयोग नहीं करते हैं, उन्हें किसी भी माध्यम से सूचना देकर निष्कासित कर दिया जाता है. इसमें डाक विभाग का गलत मोहर का इस्तेमाल किया जाता है. जेएससीए में जितने भी बड़े मैच यानी एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच, टी-20 मैच, आइपीएल मैच, सेलीब्रिटी क्रिकेट लीग जैसे मैच होते हैं. उनके लिए अधिक टिकटों की प्रिटिंग की जाती है. लीग झारखंड क्रिकेट संघ के पैसों का अपने पक्ष में गलत उपयोग कराने की बातें कही गयी थी. इसके अलावा अपने परिचित संवेदकों को स्टेडियम का आधारभूत संरचना बनाने में 250 करोड़ रुपये का बंदरबांट करने को भी अदालत ने गंभीरता से लिया है.
अंडर प्रमाण पत्र ऑफ पोस्टिंग (यूपीसी) देश भर में बंद, जेएससीए में लागू
अदालत ने मामले में दो जांच साक्षियों जीतू पटेल और एनजे प्रकाश का बयान भी दर्ज किया गया था. अदालत में ये दस्तावेज दिये गये कि कैसे महानिरीक्षक निबंधन सोसाइटी द्वारा किये गये स्पष्टीकरण का जवाब भी नहीं दिया गया. सोसाइटी नियमों के उल्लंघन पर पांच वर्षों का एक ही समय यूपीसी की जानकारी देते हुए कार्यालय में जमा कराने की बातें कही गयीं. यहां यह बताते चलें कि सरकार ने अंडर प्रमाण पत्र ऑफ पोस्टिंग 21.1.2011 से बंद कर दिया है. इसके बाद भी गलत मोहर लगा कर इसे महानिरीक्षक कार्यालय भेज दिया गया. सदस्यों को बैठक कराने की जानकारी प्रबंध समिति ने नहीं दी. जब अदालत और महानिबंधक कार्यालय ने पूछा, तो कहा कि सभी को यूपीसी के तहत डाक विभाग से जानकारी दे दी गयी.
बीसीसीआइ के फंड का भी हुआ गलत उपयोग
बीसीसीआइ ने जेएससीए को 185 करोड़ से अधिक का फंड दिया गया. इस फंड का क्या किया गया. इसका ब्योरा जेएससीए की तरफ से नहीं दिया जाता है. जेएससीए के पदधारियों का कहना है कि हमने खेल की आधारभूत संरचना विकसित करने में राशि खर्च की गयी पर इसका लेखा-जोखा एजीएम से लेकर अन्य रिपोर्टों में भी नहीं दी गयी.

