इकनोमिक सर्वे रिपोर्ट में टैक्सदाताओं को राहत देने की सलाह
रांची:- आर्थिक मामलों के जानकार सूर्यकांत शुक्ला ने कहा कि लोकसभा में इकनोमिक सर्वे रिपोर्ट वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया. यह रिपोर्ट चीफ इकनोमिक एडवाइजर के मार्गदर्शन में आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा तैयार किया गया है, जिसमें चालू वित्तीय वर्ष की विभिन्न आर्थिक घटनाओं पर तथ्यपरक स्थिति का चित्रण रहता है. इसमें मुख्य आर्थिक सलाहकार के दृष्टिकोण और सुझाव भी होते हैं, हालांकि वित्त मंत्रालय सर्वा रिपोर्ट की सलाह मानने को बाध्य नहीं है.
सूर्यकांत शुक्ला ने कहा कि कोविड-19 के दौरान सख्त लॉकडाउन के कारण जीडीपी में आयी भारी गिरावट का कारण माना गया और चालू वित्त वर्ष में जीडीपी में 7.7 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान व्यक्त किया गया. आरबीआई का अनुमान 7.5प्रतिशत निगेटिव और सीएसओ का पहला अग्रिम अनुमान भी 7.7 निगेटिव ग्रोथ का रहा है. उन्होंने कहा कि नीतिगत सुझाव सरकार के लिये महत्वपूर्ण है जिसमें अधिक सक्रिय प्रति चक्रीय राजकोषीय नीति अपनाने की बात का जिक्र है. सरल भाषा में विकास दर में आयी गिरावट का मुकाबला करने के लिये अधिक खर्च करने की सलाह है साथ ही कम टैक्स लगाने की बात है. पूंजीगत खर्च बढ़ाकर और टैक्स मोर्चे पर कर दाता को राहत देकर अर्थव्यस्था को तेज गति देने की बात है. साथ ही खपत में कमी को अर्थव्यवस्था में गिरावट का कारण माना गया . उन्होंने कहा कि आने वाला बजट ही बतलायेगा कि खर्च को कितना समर्थन मिला और खपत बढ़ाने के लिए उपभोक्ता को क्या राहत मिली.
मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमनियन ने आर्थिक सर्वे रिपोर्ट में काउंटर साईक्लिकल फिस्कल पालिसी को अपनाने की बात कहकर पूंजीगत में खर्च बढ़ाने और खपत बढ़ाने के लिहाज से टैक्स में राहत देकर अर्थव्यवस्था की मंदी को दूर करने की रणनीति सुझाई है. बजट में देखना दिलचस्प होगा कि उपभोक्ता को खपत खर्च बढ़ाने के लिये क्या उपाय किये जाते है और बुनियादी ढांचा निर्माण के लिये दीर्घकालीन वित्तपोषण की व्यवस्था सरकार कैसे करती है.. सर्वे में अगले वित्त वर्ष 2021-22 में भी शेप रिकवरी की बात है. सभी जानकर दोहरे आंकड़ों की ग्रोथ का अनुमान लगा रहे हैं आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमान में 11प्रतिशत ग्रोथ की बात की बात है. ग्रोथ को बनाये रखना चुनौती होगी. इसके लिये आर्थिक सलाहकार का सुझाव सामयिक और उपयुक्त प्रतीत होता है जिसमें करों में कमी और खर्च में बढ़ोतरी की सलाह है. यह तो आनेवाला आम बजट ही बताएगा कि सलाह को कितनी अहमियत मिली.
