नई दिल्ली: गौतमबुद्ध नगर जिले में कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद पहली महिला एडिशनल पुलिस कमिश्नर बनीं श्रीपर्णा गांगुली का कहना है कि बतौर एडिशनल पुलिस कमिश्नर, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में पब्लिक और पुलिस को जोड़कर करीब ले आना ही मेरी यहां की तैनाती में सबसे बड़ी चुनौती है.
गौतमबुद्ध नगर जिले की पुलिस कमिश्नरी में तैनाती के दौरान मेरी दूसरी प्राथमिकता यहां ट्रैफिक समस्या का समाधान है. उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि जब तक पुलिस और पब्लिक मन-विचारों से नहीं घुलेंगे-मिलेंगे, तब तक परेशानियां दोनों के सामने मुंह बाए खड़ी रहेंगी.
यहां मौजूद पुलिस और पब्लिक के बीच की खाई को विश्वास से ही पाटा जा सकता है. श्रीपर्णा गांगुली 2004 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं. उप्र के फतेहपुर जिले की पहली महिला पुलिस अधीक्षक बनने का सेहरा भी श्रीपर्णा के ही सिर बंधा था. दक्षिणी ध्रुव के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर पर तिरंगा फहराने का श्रेय भी हिंदुस्तान में सबसे पहले अगर किसी महिला आईपीएस अधिकारी को जाता है, तो वो भी श्रीपर्णा गांगुली ही हैं.
ऐसी प्रतिभा की धनी श्रीपर्णा 1990 के दशक में करीब डेढ़ साल सीडॉट में सैम पित्रोदा के नेतृत्व में बतौर डॉक्यूमेंटेशन एग्जीक्यूटिव के पद पर भी नौकरी कर चुकी हैं. यह बात तब की है जब भारतीय पुलिस सेवा से श्रीपर्णा का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था. पुलिस की नौकरी में आकर क्या कुछ खोया-पाया? पूछे जाने पर श्रीपर्णा ने कहा, पुलिस खोने-पाने का घर नहीं है. इंसान को पुलिस ही मजबूत बनाकर चुनौतियों से दो-दो हाथ करना सिखाती है.
हो सकता है पुलिस को लेकर और लोगों की राय अलग-अलग हो. मगर मेरा निजी अनुभव यही है. पुलिस ने हमेशा मेरा मनोबल बढ़ाया है. मेरी दिली इच्छा है कि पुलिस और पब्लिक के बीच मौजूद अविश्वास की खाई केवल कम न करूं, बल्कि इसे पूरी तरह खत्म कर सकूं. नोएडा पुलिस और यहां की पब्लिक में हमेशा तनातनी रहती है. इसे किस रूप में स्वीकार करती हैं? पूछे जाने पर नोएडा की पहली महिला एडिश्नल पुलिस कमिश्नर ने कहा, जानती हूं.
जो आप बता रहे हैं, वह सच है. नोएडा की नई कमिश्नरी में तैनाती के दौरान यहां की पब्लिक और पुलिस के बीच मौजूद अविश्वास की खाई को खत्म करना मेरी पहली चुनौती है. दूसरी चुनौती गौतमबुद्ध नगर में ट्रैफिक सिस्टम को कारगर और सरल बनाना है. यहां तैनाती के बाद के चंद दिनों में ही मैं समझ गई कि मेरी सबसे पहली जिम्मेदारी, पुलिस को पब्लिक के काबिल बनाना होगा. इसके लिए विशेष प्रशिक्षण की जरूरत है. जो देने के लिए मैं तत्पर हूं.
जबकि पब्लिक को समझाना होगा कि पुलिस या पुलिस में हर कर्मचारी-अफसर एक सा नहीं है. अच्छे-बुरे लोग समाज में सब जगह मौजूद हैं. हमें समझ-सामंजस्य से एक दूसरे को समझकर करीब आने की जरूरत है. नोएडा कमिश्नरी में मेरा पहला एडिश्नल पुलिस कमिश्नर (महिला आईपीएस) बनना उतना मायने नहीं रखता, जितना मेरे लिए यहां मौजूद चुनौतियों से पार पाना.

