खास बातें:-
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दो बार टेंडर हो चुका है रद्द, तीसरी बार बाहरी को देने की तैयारी
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टेंडर के लिए विरोधाभाषी व हैरान करने वाली हैं शर्ते
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आपूर्तिकर्ता को तीन साल मशीन सप्लाई का देना होगा एक्सपीरियेंस सर्टिफिकेट
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टेंडर पाने वाले को देना होगा डीलर ऑथोराइजेशन सर्टिफिकेट
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जिसका हर जिला में होगा सर्विस सेंटर, उसी को मिलेगा टेंडर
रांचीः पथ निर्माण विभाग में हुए टेंडर के खेल के बाद अब पशुपालन विभाग में टेंडर का खेल हो रहा है. यह खेल भी घास काटने वाली मशीन पर ही खेला जा रहा है. इस मशीन की सप्लाई को लेकर टेंडर की जो शर्तें रखी गई हैं वह हैरान करने वाली हैं. टेंडर की शर्तें पूरी तरह से विरोधाभाषी हैं.
टेंडर एक शर्त के अनुसार, शपथ पत्र के साथ मशीन सप्लाई के लिए तीन साल का एक्सपीरियेंस होना चाहिए, जबकि दूसरी शर्त यह रखी गई है कि सिर्फ डीलरशीप ऑथोराइजेशन ही चलेगा.
बताते चलें कि पशुपालन विभाग के इन नियम-परिनियमों के कारण घास काटने वाली मशीन का टेंडर दो बार रद्द भी हो चुका है. विभाग रद्द होने की वजह सिर्फ यही बता रहा है कि किसी पार्टी ने क्वालिफाई ही नहीं किया.
झारखंड में चाफ कटर बनाने की यूनिट ही नहीं
दिलचस्प बात यह है कि झारखंड में बड़े पैमाने पर चाफ कटर (घास काटने वाली मशीन) बनाने वाली यूनिट ही नहीं है, जो 10 हजार मैन्यूनल और पांच हजार ऑटोमेटिक मशीन बना कर दे. ऐसे में जाहिर है कि बाहर की कंपनियों को यह टेंडर देने की तैयारी है. वहीं टेंडर में शर्त यह भी रखी गई है कि निविदाकर्ता का टर्न ओवर एक करोड़ से अधिक का होना चाहिए.
मशीन सप्लाई में लगभग 13 करोड़ की आएगी लागत
पशुपालन विभाग ने घास काटने की मशीन के लिए जो टेंडर निकाला है, उसके तहत 10 हजार मैन्यूअल व पांच हजार ऑटोमेटिक मशीन की सप्लाई होनी है. इन मशीन की सप्लाई करने में लगभग 13 करोड़ रुपए की लागत आएगी. इसमें एक ऐसी भी शर्त रखी गई है कि जिसे मशीन की सप्लाई का टेंडर मिलेगा उसका हर जिला में एक सर्विस सेंटर भी होना चाहिए. इस मसले पर पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है.

