रांची: लॉकडाउन के बाद सरकार की ओर से ऑफलाइन और ऑनलाइन शराब की बिक्री शुरू की गई थी, ताकि लोगों की भीड़ दुकानों में कम हो सके. लेकिन पिछले 20 दिनों में मुश्किल से आधा दर्जन ऑनलाइन शराब के ऑर्डर आ सके.
इसके बाद अब उत्पाद विभाग की ओर से आगे ऑनलाइन शराब बिक्री की अवधि को नहीं बढ़ाया गया है. इसके साथ ही होम डिलीवरी के लिए कई कंपनियों को जोड़ने की मुहिम भी अधर में लटक गई है.
इधर, शराब विक्रेताओं का कहना है कि लोग ऑनलाइन की जगह खुद दुकानों में आकर शराब की खरीदारी कर रहे हैं. सरकार ने जो भीड़ की बात की थी, उस तरह की भीड़ झारखंड की शराब दुकानों में नहीं दिखी. ऑनलाइन शराब का ऑर्डर देने से लोग कतरा रहे हैं. सूबे के नौ बड़े शहरों में शराब की होम डिलिवरी की व्यवस्था की गई थी.
दूसरी ओर ऑनलाइन ऑर्डर लेने के लिए दो निजी कंपनियों को रखा गया था. इनके माध्यम से ऑर्डर का पैसा दुकानदारों के खाते में दस दिनों में भेजा गया. इतनी देर से होने वाले भुगतान को लेकर भी व्यवसायियों ने विरोध किया था.
इनका कहना था कि जब सरकार समय पर टैक्स लेती है और अन्य शुल्क का समय तय कर दिया गया है तो फिर इतने लंबे अंतराल के बाद भुगतान कैसे लिया जाए. अन्य काम इससे बाधित होंगे और अलग से एक नया खाता ऑनलाइन के लिए बनाना पड़ेगा. इस तरह से दुकानदारों की समस्या बढ़ेगी.
सूबे में महंगी दर पर शराब दुकानें खुली थीं :
सूबे में शराब दुकानें नई दर के साथ खुली थीं. विभाग ने नई दर बढ़ने का कारण बताया था कि शराब में वैट 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है.
साथ ही कोरोना महामारी को देखते हुए स्पेशल एक्साईज ड्यूटी 10 प्रतिशत बढ़ायी गई है. इससे राजस्व की भरपाई हो सकेगी. वहीं, शराब व्यवसायियों का कहना था कि लॉकडाउन में लोगों के सामने बेरोजगारी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है और ऐसे में शराब के दाम बढ़ने से लोग परेशान हैं, जबकि दूसरे राज्य में स्पेशल एक्साईज ड्यूटी कम कर दी गई है.

