जब अस्पताल की जगह बंगले में लालू प्रसाद का इलाज संभव है तो यही इलाज जेल में क्यों नहीं हो सकता?
रांची: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा की लालू प्रसाद और उनके समर्थकों के द्वारा जेल मैनुअल का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है और राज्य सरकार इस पूरे मसले पर मूकदर्शक बनी है. प्रतुल ने कहा कि जब जेल आईजी ने 31 अगस्त 2020 को पत्रांक संख्या 1657 में यह स्पष्ट रूप से कहा है कि रांची में बंगले में प्रतिनियुक्त पुलिस पदाधिकारियों के द्वारा नियम विरुद्ध एवं मनमाने ढंग से लालू प्रसाद से बाहरी लोगों का मुलाकात कराया जा रहा है.
जेल आईजी ने अपने पत्र में यह भी कहा की मुलाकातियों के द्वारा राजनीतिक बयान भी दिया जा रहा है जो सर्वथा नियम विरुद्ध है. प्रतुल ने कहा की राज्य सरकार सिर्फ मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कर आईवॉश कर रही है. राज्य सरकार ने लालू प्रसाद के सामने घुटने टेक दिया है. इसलिए उस बंगले में मजिस्ट्रेट की नियुक्ति हो या कमिश्नर की हो,व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं आने वाला है.
प्रतुल ने कहा की 27 नवंबर 1998 को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जस्टिस एम के मुखर्जी की अध्यक्षता वाली पीठ ने लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्रा पर जेल मैनुअल का उल्लंघन करने और मिली सुविधाओं का दुरुपयोग करने के आरोप में उन्हें तुरन्त बीएमपी गेस्ट हाउस से बेउर जेल शिफ्ट करवा दिया था. प्रतुल ने कहा की रांची में भी दुरुपयोग की वही कहानी दोहराई जा रही है. लालू प्रसाद को मिला बंगला राजद का प्रधान चुनावी कार्यालय बन गया है और यहीं से बिहार के चुनाव अभियान का संचालन हो रहा है. प्रतुल ने कहा की अब सरकार को अविलंब लालू प्रसाद को सभी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराते हुए वापस होटवार जेल भेज देना चाहिए. क्योंकि जब अस्पताल की जगह उनका इलाज बंगले में संभव है तो यही इलाज जेल परिसर में क्यों नहीं हो सकता?

