-
फेडरेशन ऑफ पेरेंट्स एसोसिएशन ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिख कर बताई परेशानी
रांची: फेडरेशन ऑफ पेरेंट्स एसोसिएशन (इंडिया) के महासचिव अजय राय ने राजधानी दिल्ली समेत देश के सभी राज्य के करोड़ों अभिभावकों की पीड़ा, परेशानी को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र के माध्यम से बताया.
उन्होंने आग्रह किया है कि दिल्ली सहित देश के सभी राज्य के विभिन्न जिलों के स्कूलों में 20-21 सत्र में कोरोना वायरस के विश्वव्यापी महामारी के कारण राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा लॉकडाउन लगाया गया है. यह लॉकडाउन कब तक रहती है इसे कह पाना बड़ा मुश्किल है.
इसके कारण अभिभावकों के सामने कई बड़ी समस्यायों के साथ साथ सबसे बड़ी समस्या उत्पन्न हुई है स्कूल फीस और बस फीस जमा किया जाना. क्योंकि लॉकडाउन के कारण कोई भी अभिभावक ना तो कोई काम कर पा रहे है ना ही वो अपना बिजनेस चला पा रहे है और ना ही छोटे-मोटे धंधे करने वाले अभिभावक कहीं आ जा पा रहे हैं.
विभिन्न राज्यों के अधिकतर छात्र-छात्राएं गरीब परिवार से आते हैं. उनके अभिभावक छोटी-मोटी नौकरी कर अपने बच्चों को पढ़ाते हैं. वर्तमान में लॉकडाउन की वजह से सभी लोगों का रोजी-रोजगार प्रभावित हुआ है. बहुत से लोगों के पास अभी स्कूल फीस देने अथवा अन्य कार्यों के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं हैं.
इधर, कई राज्यों के स्कूलों ने अभिभावकों को स्कूल और बस फीस के लिए नोटिस देना शुरू कर दिया है, ऐसे में अभिभावक करे तो क्या करे यह सोचनीय प्रश्न हर ओर खड़ा हो गया है. जबकि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले 3 महीनों के लिए घर मालिको को किराएदारों से किराया तक नहीं लेने की अपील सार्वजनिक तौर पर की है.
राय ने कहा कि पिछले 3 माह के अंदर भारत का विकास दर में तकरीबन 8% की कमी आई है देश के अंदर आइ आर्थिक मंदी के कारण कई बड़े औद्योगिक इकाइयों में मजदूर कर्मचारियों की छटनी तेजी से हो रही है और अगले 3 महीनों के अंदर लगभग 70 % लोग नॉकरी से वंचित होंगे यह अनुमान है.
वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के काम में 11 गुना गिरावट आई है, पर्यटन सेक्टर में लगभग 50 लाख लोग कोविड-19 के कारण प्रभावित हुए है. वहीं कोविड-19 के कारण देस का लघु कुटीर उद्योग एग्रीकल्चर, देश के किसानों के हालात भुखमरी पर आकर टिक गई है.
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) के एक सर्वेक्षण के अनुसार, COVID-19 के तात्कालिक प्रभाव से पता चलता है कि वस्तुओं और सेवाओं की मांग और आपूर्ति पर प्रत्यक्ष प्रभाव के अलावा, कारोबार भी धीमा होने के कारण नकदी प्रवाह कम हो रहा है.
आर्थिक गतिविधि जो बदले में कर्मचारियों, ब्याज, ऋण चुकौती और करों सहित सभी भुगतानों पर प्रभाव डाल रही है. प्रमुख सर्वेक्षण से यह पता चलता है कि 53 प्रतिशत भारतीय व्यवसायों को शुरुआती चरणों में व्यापार के संचालन पर COVID-19 महामारी के चिह्नित प्रभाव का संकेत मिलता है. महामारी ने लगभग 80 प्रतिशत नकदी प्रवाह में कमी की रिपोर्ट के साथ संगठनों पर नकदी प्रवाह को काफी प्रभावित किया है.
आपूर्ति श्रृंखला पर महामारी का व्यापक प्रभाव पड़ा है, क्योंकि 60 प्रतिशत से अधिक आपूर्तिकर्ताओं ने संकेत दिया है कि उनकी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है.
उन्होंने कहा कि ऐसे में द्वारा ट्वीट के माध्यम से यह कहा जाना कि स्कूल तीन महीने की जगह एक-एक महीने का फीस ले यह देश के करोड़ों अभिभावकों के साथ घोर मजाक है. कोरोना के विश्वव्यापी महामारी में जिसमें समाज के हर वर्ग के लोग प्रभावित हैं जिस पर पुनर्विचार जरूरी है.
उन्होंने आग्रह किया है कि राजधानी दिल्ली सहित सभी प्रदेश राज्य सरकार के लिए स्पस्ट आदेश जारी करे ताकि मानवता के नाते और कोरोना के इस महामारी में अभिभावकों से विद्यालय बंद रहने की पूरी अवधि का स्कूल व बस फीस सभी निजी विद्यालय द्वारा छात्र/छात्राओं से नहीं लिया जाए, ताकि लॉकडाउन की वजह से बच्चों का आगे की पढ़ाई बाधित नहीं हो.

