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BCCL से वाकिफ हूं, झरिया मास्टर प्लान लागू करने की कोशिश होगी: गोपाल सिंह

by bnnbharat.com
September 1, 2020
in Uncategorized
BCCL से वाकिफ हूं, झरिया मास्टर प्लान लागू करने की कोशिश होगी: गोपाल सिंह
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रांची: सीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह ने कहा कि आज ही बीसीसीएल ज्वाइन करुंगा. उन्होंने कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया से आदेश जारी करने का आग्रह किया है. सिंह ने कहा कि वे बीसीसीएल के चार्ज में दो बार रह चुके हैं. कंपनी की स्थिति से पूरी तरह वाकिफ है. सिंह आज सीसीएल मुख्यालय में संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे.

गोपाल सिंह ने कहा कि बीसीसीएल की सबसे बड़ी समस्या झरिया मास्टर प्लान है. कोशिश करूंगा कि इसका समाधान हो. उन्होंने कहा कि झरिया का पुनर्वास नहीं हुआ तो बीसीसीएल के पास कुछ नहीं बचेगा. रिजर्व रहते हुए कोयला नहीं निकाल सकेगा.

उन्होंने कहा कि प्लान से वाकिफ हूं. इसका क्रियान्वयन धरती पर करने की जरूरत है. सिंह ने कहा कि बीसीसीएल ने प्राइवेट माइंस का टेकओवर किया है. यह आग उसे विरासत में मिली है. बीसीसीएल ने आग नहीं लगाई है.

इस दौरान उन्होंने अपने सीसीएल एक कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि सीसीएल में वे साढ़े आठ साल सीएमडी रहे. जब उन्होंने ज्वाइन किया था, तब सीसीएल का उत्पादन 43 से 48 मिलियन था. स्टॉक भी बहुत अधिक था. उसमें आग लगी रहती थी.

इस दौरान सीसीएल के उत्पादन में सबसे बड़ा योगदान पिपरवार का था. वहां से 14 मिलियन टन कोयला निकलता था. वहां रिजर्व खत्म होने के बाद उसे बंद कर दिया गया. कल्याणी भी बंद हो गई. रोहिणी बंद हो रही है. यही स्थिति रहती तो आज सीसीएल का उत्पादन 20 से 25 मिलियन टन होता और सीसीएल बीमार कंपनी हो जाती है.

उन्होंने कहा कि प्रयास कर मगध-आम्रपाली परियोजना शुरू की. इन परियोजनाओं से मिलाकर 110 मिलियन टन कोयला उत्पादन हो सकता है. इसी तरह संघमित्रा परियोजना भी शीघ्र शुरू होने वाली है. यहां से 20 मिलियन टन कोयला होगा. कारो और कोनार से 10 मिलि‍यन टन उत्पादन होने की संभावना है.

पुरानी कोलियरि‍यों से 40 से 45 मिलियन टन कोयला उत्पा दन हो सकता है. इस तरह आने वाले दिनों में सीसीएल 200 मिलियन टन कोयले का उत्पादन करेगा. सभी प्रोजेक्ट की स्वीकृती हो चुकी है.

उन्होंने बताया कि मगध आम्रपाली में सबसे बड़ी बाधा रेल लाइन की थी. वह रेल लाइन भी बन गई है. अब कोयला भेजने में कोई दिक्कत नहीं होगी. सरकारी जमीन के मुआवजे का मामला भी पिछले 30 साल से लटक रहा था. उसका भी समाधान हो गया.

सीसीएल में मेजर समस्याओं का समाधान हो गया है. अब उत्पादन में कहीं किसी तरह की दिक्कत नहीं है. उन्होंने कहा कि झारखंड सहित पूरे राष्ट्र को सीसीएल की जरूरत है.

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