नई दिल्ली. सत्ता संभालने के 36वें दिन अमेरिकी राष्ट्र5पति जो बाइडेन ने मिडिल ईस्ट पर एक बड़ा एक्शान लिया है. अमेरिका ने कासिम सुलेमानी का बदला लेने पर उतारू शिया आतंकी गुटों पर राकेट से हमला किया है.
15 फरवरी को मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी और दूसरे विदेशी फौजियों के ठिकाने कुर्दिस्तान के अर्बिल के मिलिट्री काम्प्लेक्स पर राकेट से हमले किये गए थे. अमेरिका ने इस हमले को ईरानी फ़ोर्स हशीद अल-शबी द्वारा कासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन में हुई मौत के साल पूरा होने पर किया गया हमला माना था.
कासिम सुलेमानी ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड का कमांडर था, जो ईराक के अलावा सीरिया और लेबनन में फैले अमेरिका विरोधी शिया आतंकियों को कंट्रोल करता था. गुरुवार रात पूर्वी सीरिया के शहर बुकमाल में विस्फोटकों से भरे 3 ट्रक पर अमेरिकी फोर्सेज ने राकेट से हमले किया, जिसमें शिया आतंकी गुट कटैब हिज्बुल्लाह और कटैब सैय्यद अल-शुहदा के 17 लड़ाके मारे गए. इन दोनों संगठनों का ताल्लुक हशीद अल-शबी से है.
पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने एक बयान में कहा, “राष्ट्रपति बाइडेन के निर्देश पर अमेरिकी सैन्य बलों ने आज शाम पूर्वी सीरिया में ईरानी समर्थित आतंकवादी समूहों के खिलाफ हवाई हमले किए.” उन्होंने कहा, “ये हमले इराक में अमेरिकी और गठबंधन कर्मियों के खिलाफ हालिया हमलों और उन कर्मियों के लिए जारी खतरों के जवाब में थे.”
किर्बी ने कहा कि लक्ष्य एक बॉर्डर नियंत्रण प्वा इंट था, जिसका उपयोग ईरानी समर्थित सशस्त्र इराकी समूहों द्वारा किया जाता था, जिसमें कटैब हिजबुल्लाह और कटैब सैय्यद अल-शुहादा शामिल थे. उन्हों ने कहा, “ऑपरेशन एक अस्पष्ट संदेश भेजता है कि राष्ट्रपति बाइडेन अमेरिकी और गठबंधन कर्मियों की रक्षा के लिए काम करेंगे.”
ईरान के निर्देश के तहत काम करने वाले समूहों द्वारा इराक में किए गए हमलों ने नए बाइडेन प्रशासन के लिए एक चुनौती खड़ी कर दी थी, क्योंकि उसने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर तेहरान के साथ फिर से शुरू की गई बातचीत के लिए एक दरवाजा खोल दिया था.
बिडेन प्रशासन का कहना है कि वह ईरान के परमाणु विकास को स्थिर करने के लिए डिज़ाइन किए गए 2015 के समझौते को पुनर्जीवित करना चाहता है. लेकिन यह तेहरान को मध्य पूर्व में एक सतत सुरक्षा खतरे के रूप में भी देखता है.

