सीसीएल की सबसे बड़ी कोल परियोजना आम्रपाली में स्थानीय के उपेक्षा का मामला
चतरा: चतरा जिले का कोयलांचल टंडवा प्रखंड में संचालित एशिया की सबसे बड़ी सीसीएल की मगध-आम्रपाली कोल परियोजना में विस्थापित व प्रभावित भू-रैयतों ने बाहरी लोगों तथा नेताओं के प्रवेश पर आपत्ति जताई है.
टंडवा प्रखंड के कुमरांग गांव स्थित शिव मंदिर में विस्थापित ट्रक-हाइवा एसोसिएशन के अध्यक्ष आशुतोष मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि बाहरी भगाओ, आम्रपाली बचाओ का नारा बुलंद किया गया है.
उन्होंने कहा है कि बाहर के लोग कोयलांचल में राजनीतिक रोटी सेंक रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारे पास स्थानीय स्तर पर राज्य के मंत्री और विधायक हैं. अगर जरूरत महसूस होगी तो यहां के आंदोलन में उन्हें आमंत्रित किया जाएगा. हमें बाहर के नेताओं की कोई आवश्यकता नहीं है.
उन्होंने कोल परियोजनाओं में कार्यरत आरकेटीसी और जय मां अंबे ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों पर क्षेत्र में गरीबों का शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि प्रतिदिन इन कंपनियों के द्वारा 25-25 हजार टन कोयले की ढुलाई होती है.
बावजूद आजतक इन कंपनियों ने स्थानीय लोगों को रोजगार देने की दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं की है. जिससे न सिर्फ यहां के लोगों को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ रहा है, बल्कि बाहरी लोगों का यहां साम्राज्य भी स्थापित होते जा रहा है.

