रांची : पिछले 32 दिनों से चल रही आंगनबाड़ी सेविकाओं-सहायिकाओं की हड़ताल से राज्य के करीबन 15 लाख बच्चे पोषाहार और शिक्षा से वंचित है . साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में ताले लटक आने से लाभुकों पर दोहरा मार पड़ रहा है . एक तो उनके निवाले पर संकट है, दूसरा केंद्र स्तर से मुहैया कराई जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं , पढ़ाई तथा अन्य सरकारी योजनाओं का भी वे लाभ नहीं ले पा रहे हैं.
बहरहाल आंगनबाड़ी सेविकाओं- सहायिकाओं का समूह राज भवन के समक्ष धरने पर है. हड़ताली सेविकाओं की नाराजगी की मूल वजह पिछले वर्ष आश्वासन के बाद भी उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हो पाना है. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगों में स्थायीकरण और मानदेय में बढ़ोतरी करना शामिल है. फिलहाल हड़ताल की वजह से मातृ वंदना , सुकन्या समृद्धि, कन्यादान, फाइलेरिया नियंत्रण, पल्स पोलियो अभियान आदि पर असर पड़ा है . धरने में बैठी आंगनबाड़ी सेविका सहायिका पिछले 13 सितम्बर से भूख हड़ताल पर चली गयी है . भूख हड़ताल के कारण कई कार्यकर्ताओ का स्वास्थ पर भी असर पड रहा है .
वंही सोमवार को हड़ताल में बैठी सेविका सहायिकाओं का हाल जानने नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन पहुंचे . इसी बीच धरने बैठी एक सेविका की अचानक तबियत तबियत बिगड़ गयी . सेविका बेहोश होकर धरने स्थल में ही गिर पड़ी जिसके बाद आनन फानन में उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया . हेमंत सोरेन भी सेविका को एम्बुलेंस तक पहुंचाने में मदद करते दिखे .
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि मानदेय वृद्धि का मुद्दा तीन वर्षों से लंबित है. अब सरकार इस मुद्दे पर कमेटी बनाने की बात कर रही है. कमेटी फिर छह-आठ माह का समय लेकर कोई रिपोर्ट देगी, जबकि हम इस मांग पर सरकार से तत्काल कार्रवाई चाहते हैं. गौरतलब है कि राज्य कैबिनेट ने बुधवार को आंगनबाड़ी कर्मियों की सेवानिवृत्ति उम्र सीमा 60 से बढ़ा कर 62 वर्ष करने पर सहमति दे दी है .

