BnnBharat | bnnbharat.com |
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
BnnBharat | bnnbharat.com |
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

फरिश्ते योजना अच्छी है, बिचौलिए द्वारा किया जा रहा इसका दुरुपयोग : दिल्ली हाईकोर्ट

by bnnbharat.com
October 31, 2019
in समाचार
फरिश्ते योजना अच्छी है, बिचौलिए द्वारा किया जा रहा इसका दुरुपयोग : दिल्ली हाईकोर्ट

फरिश्ते योजना अच्छी है, बिचौलिए द्वारा किया जा रहा इसका दुरुपयोग : दिल्ली हाईकोर्ट

Share on FacebookShare on Twitter

नई दिल्ली: सरकारी अस्पतालों की समस्या और भ्रष्टाचार को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एजे भंभानी व न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी की पीठ ने कहा कि फरिश्ते योजना अच्छी है, लेकिन बिचौलिए द्वारा इसका दुरुपयोग किया जा रहा है. पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि बिचौलिए ने इस योजना को हथिया लिया है. इसके जवाब में दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने दलील दी कि इससे दुर्घटना के शिकार व्यक्ति की सच में मदद करने वालों का उत्साह बढ़ता है. इस दलील पर पीठ ने कहा कि ऐसा कहना गलत नहीं है कि कोई व्यक्ति घर में गिरता है तो दलाल उसे भी अस्पताल ले जाते हैं. इससे अस्पताल में भीड़ बढ़ रही है, जहां सबसे कमजोर वर्ग का व्यक्ति इलाज कराने आता है.

दो सदस्यीय पीठ ने उक्त टिप्पणी तब की जब दिल्ली सरकार व हाईकोर्ट द्वारा गठित की गई विशेषज्ञों की कमेटी की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने पीठ से मामले में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दो महीने और समय देने की मांग की.

दिल्ली हाई कोर्ट ने 6 जून को कमेटी को 4 महीने के अंदर रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था. अधिवक्ता ने दलील दी कि जानकारी जुटाने में कमेटी को अस्पतालों से सहयोग नहीं मिल रहा है. अधिवक्ता ने सहयोग न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की लेकिन पीठ ने मांग को ठुकराते हुए कहा कि रिपोर्ट दायर करने की प्रक्रिया चलती रहेगी. अब आपको सही मुद्दे पर बात करनी चाहिए.

मधुबाला के बच्चे की मौत जीटीबी अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर नहीं मिलने के कारण गर्भ में ही हो गई थी. अस्पताल की लापरवाही के कारण तीन दिन तक उनका मृत बच्चा पेट में ही रहा और उनकी जान को भी खतरा हो गया. इसके बाद मधुबाला ने अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा के माध्यम से जीटीबी अस्पताल समेत पांच बड़े सरकारी अस्पताल के खिलाफ जनहित याचिका दायर की थी. याचिका में 35 सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था की रिपोर्ट पेश की गई थी. अस्पतालों में एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (एएमसी), कॉम्प्रीहेंसिव मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (सीएमसी) उपलब्ध नहीं हैं. फर्जी कंपनियों के द्वारा उपकरण की खरीद होती है और इसके कारण एएमसी व सीएमसी उपलब्ध नहीं है.

 

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window)
  • Click to share on X (Opens in new window)

Like this:

Like Loading...

Related

Previous Post

मनरेगा के तहत बने 40 सड़क गायब, महाघोटाले की अपर आयुक्त ने की जांच

Next Post

रीवा के NGO से गोद लिए बच्चों का हुआ यौन शोषण

Next Post
Reva's NGO adopts sexually abused children

रीवा के NGO से गोद लिए बच्चों का हुआ यौन शोषण

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Privacy Policy
  • Admin
  • Advertise with Us
  • Contact Us

© 2025 BNNBHARAT

No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

© 2025 BNNBHARAT

%d