जमशेदपुर: इधर जमशेदपुर के तुरामडीह के ग्रामीणों का गुस्सा यूरेनियम कार्पोरेशन ऑफ इंडिया यानि यूसिल के खिलाफ फूट पड़ा. गुरुवार को सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और तुरामडीह परियोजना के विस्तार का पुरजोर तरीके से विरोध जताते हुए अविलंब उक्त परियोजना को बंद करने की मांग की. आपको बता दे कि परियोजना का यूसिल प्रबंधन की ओर से बांदुहूडागा तक विस्तार किया गया है जहां ओपन कास्ट ब्लास्टिंग से ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है. वैसे ये ग्रामीण परियोजना के विस्थापित है और अब इन्होंने परियोजना ओपन कास्ट ब्लास्टिंग का विरोध शुरू कर दिया है.
विस्थापितों का सीधे तौर पर आरोप है कि जब ओपन माइंस खुल रहा था तो ग्रामीणों का जमीन लिया गया. लेकिन उसके एवज में नौकरी नहीं मिली और ना ही उचित मुआवजा. उधर उचित मुआवजा की मांग को लेकर विस्थापितों ने जिला प्रशासन और यूसीआईएल प्रबंधन को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है और कहा है कि अगर 15 दिनों के भीतर उचित मुआवजा और नौकरी नहीं मिली तो यूसीआईएल गेट में ताला लगा देंगे.
उससे पहले मुख्यमंत्री और राज्यपाल से मुलाकात कर अपनी बात रखेंगे. उसके बाद भी अगर बात नहीं बनी तो यूसीआईएल के अधिकारी और कर्मचारियों को माइंस से बाहर नहीं निकलने देंगे. उधर ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन पर वैमनस्य का भी आरोप लगाया है और कहा है कि जब माइंस के लिए जमीन लेना था तो गलत तरीके से जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया. वहीं अब ब्लास्ट के कारण ग्रामीण दहशत में है. जब-जब ब्लास्ट होता है गांव के लोग गांव छोड़कर निकल जाते हैं. हालांकि जमीन अधिग्रहण के बाद भी ग्रामीणों ने जमीन नहीं छोड़ा लेकिन जो खाली पड़ी जमीन है उस जमीन पर परियोजना अपना काम कर रही है.
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उधर उपायुक्त ने इन ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि इस मुद्दे पर वार्ता की जाएगी और जो उचित होगा वह कदम उठाया जाएगा. तुरामडीह माइंस के आसपास के एक दर्जन गांव ब्लास्ट से प्रभावित है.

