रांचीः किसान विरोधी दल आज किसानों के हितैषी बनने का दिखावा कर रहे हैं. मोदी सरकार ने किसानों के जीवन में बदलाव लाने के लिए तीन कानून बनाये. लेकिन 70 साल तक अन्नदाताओं के नाम पर योजना बनाकर अपना पेट भरनेवाली पार्टियां इन कानूनों को लागू करने का विरोध कर रही हैं. किसानों के कंधे पर बिचौलिये और राष्ट्रविरोधी शक्तियां अपना एजेंडा चला रहे हैं.
झारखंड के किसान ऐसा नहीं होने देंगे. उक्त बातें पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहीं. वे कांके के सुकुरहुट्टू में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित प्रमंडलीय किसान पंचायत को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार मोदी सरकार ने किसानों के खाते में सीधी राशि भेजने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की शुरुआत की.

इसी से प्रेरणा लेते हुए हमारी सरकार ने झारखंड में मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना शुरू की. इससे छोटे-सीमांत किसानों को हर साल 11 से 31 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल रही थी, किसान सूदखोरों के चंगुल से बच रहे थे. लेकिन राज्य में सरकार बदलते ही हेमंत सोरेन सरकार ने यह योजना बंद कर किसानों को बड़ा धक्का पहुंचाया है. हेमंत सरकार यदि सही में किसानों की हितैषी है, तो फिर से मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना शुरू करे. हमारी सरकार ने देश में पहली बार किसानों के फसल बीमा का प्रीमियम भरने का काम किया, लेकिन वह भी इस सरकार ने बंद कर दिया.
दास ने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों का दर्द समझते हुए उनकी काफी पूरानी मांग पूरी करते हुए अन्नदाताओं को मंडी के साथ ही किसानों को अपनी फसल कहीं भी बेचने का अधिकार दिया. किसानों को फसल का जहां ज्यादा कीमत मिले, वे वहां अपने उत्पाद बेच सकेंगे. लेकिन बिचौलियों को इससे नुकसान होगा. वे यह कानून नहीं चाहते हैं. कांग्रेस जब सत्ता में थी को स्वामीनाथन रिपोर्ट को दबा कर बैठ गयी.

मोदी ने इसी रिपोर्ट के आधार पर कृषि कानूनों में व्यापक बदलाव करते हुए नये कानून बनाये, जो किसानों के हित में हैं. मोदी सरकार ने ही पिछले छह साल में न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुणा किया. विपक्ष यह भ्रम फैला रहा है कि मोदी सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य को समाप्त कर देगी. इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट कहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य था, है और रहेगा. विपक्ष का भ्रामक प्रचार नहीं चलेगा. मोदी सरकार ने ही किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए सीधी बिक्री की सुविधा दी. आजादी के बाद से बंदिशों में जकड़े किसानों को आजादी दिलायी. राष्ट्रविरोधी शक्तियों ने किसानों के कंधे पर बंदुक रखकर एक और झुठ फैलाया कि देश से मंडी व्यवस्था समाप्त हो जायेगी. इस पर भी केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मंडी की व्यवस्था लागू रहेगी, इसके अलावा किसानों को कहीं भी अपना उत्पाद बेचने की छूट दे दी है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष का काम हमेशा से भ्रम फैलाना रहा है. सर्जिकल स्ट्राइक और सीएए के समय में भी भ्रम फैलाया गया था. मोदी सरकार पर सवाल खड़े किये गये थे. लेकिन देश की जनता ने विपक्ष को मुंह तोड़ जवाब दिया.
इस बार भी किसानों की आड़ में खालिस्थान की मांग करने वाले और भारत के टूकड़े करने के समर्थक अपना एजेंटा चलाने में लगे हुए हैं. कांग्रेस, वामपंथी व अन्य़ विपक्षी दल भारत को कमजोर करने का काम कर रहे हैं. हमें इसका एकजुट होकर विरोध करना होगा.
8 दिसंबर को किसानों की आड़ में विपक्ष ने भारत बंद बुलाया. इसे झारखंड के किसानों व आम लोगों ने विफल कर दिया. किसान झांसे में नहीं आये. बंद के दौरान सड़क पर किसान विरोधी और बिचौलिये थे, वहीं किसान खेतों में थे.
झारखंड में सत्ता पाने के लिए झामुमो-कांग्रेस ने लोगों से बड़े-बड़े वादे किये थे. युवाओं को हर साल 72 हजार रुपये, महिलाओं को 2000 रुपये चूल्हा खर्च जैसे वादे किये. लेकिन अब तक किसी को कुछ नहीं दिया. शहीद निर्मल महतो जी के शहादत दिवस पर हेमंत सोरेन ने सत्ता मिलने पर एक साल में पांच लाख लोग को नौकरी देने का ऐलान करते हुए कहा था कि ऐसा नहीं कर पाने की स्थिति में वे राजनीति से सन्यास ले लेंगे.
अब एक साल होने को है, झारखंड के पांच युवा भी भी नौकरी नहीं मिली है. बल्कि जो पहले से नौकरी कर रहे थे, आज उनकी नौकरी जा रही है. झारखंड में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी लचर होती जा रही है. राज्य पिछले दस माह में 1300 से ज्यादा महिलाओं व बच्चियों का बलात्कार हुआ. इसमें भी सबसे ज्यादा आदिवासी महिलाओं व बच्चिय़ों का बलात्कार और हत्या हुई है. अपराधियों के हौसले बुलंद हो और हेमंत सरकार सोई हुई है. जल, जंगल जमीन और आदिवासी हित का नारा देनेवालों के शासन में सबसे ज्यादा आदिवासी ही प्रताड़ित हो रहे हैं. ऐसी सरकार को उखाड़ फेकना है.
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष समीर उरांव ने कहा कि बिचौलिए और देश विरोधी किसानों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं. मोदी सरकार को अस्थिर करना ही उनका एजेंडा है. वे किसानों व देश का हित नहीं चाहते हैं. उन्हें केवल अपना हित साधना है. लेकिन किसानों ने उनका एजेंडा चलने नहीं दिया है.
कार्यक्रम में क्षेत्र के किसानों ने नये कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए मोदी सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया. इस दौरान रांची के सांसद संजय सेठ, लोहरदगा के सासंद सुदर्शन भगत, कांके विधायक समरी लाल, हटिया विधायक नवीन जायसवाल, पूर्व विधायक गंगोत्री कुजूर, रामकुमार पाहन, जीतूचरण राम, शिवशंकर उराव, झारखंड भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष गंगोत्री कुजूर समेत बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे.

