नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया. सरकार ने प्रमुख श्रमिक कानूनों को शिथिल कर दिया. एक अध्यादेश को मंजूरी दी है, जो प्रमुख श्रम कानूनों से छूट देता है. यह छूट तीन साल के लिए प्रभावी होगी.
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि लॉकडाउन के कारण प्रदेश में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियां बहुत ज्यादा प्रभावित हुई हैं. सभी उद्योग बंद रहे हैं. ऐसे में औद्योगिक क्षेत्र की ग्रोथ को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है. हालांकि कुछ श्रम कानूनों को इस अध्यादेश की परिधि से बाहर रखा गया है.
इस बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाया है. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने एक अध्यादेश के द्वारा मजदूरों को शोषण से बचाने वाले ‘श्रम कानून’ के अधिकांश प्रावधानों को 3 साल के लिए स्थगित कर दिया है. ये बेहद आपत्तिजनक व अमानवीय है. श्रमिकों को संरक्षण न दे पाने वाली गरीब विरोधी भाजपा सरकार को तुरंत त्यागपत्र दे देना चाहिए.

