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कढ़ाई और जरी कारोबार से जुड़े कारीगरों को हुनर का नहीं मिल रहा है दाम

लॉकडाउन में अपने वतन वापस लौटे ये मजदूर दूसरे राज्यों में रहकर करते थे कारीगरी

by bnnbharat.com
June 9, 2020
in Uncategorized
कढ़ाई और जरी कारोबार से जुड़े कारीगरों को हुनर का नहीं मिल रहा है दाम

कढ़ाई और जरी कारोबार से जुड़े कारीगरों को हुनर का नहीं मिल रहा है दाम

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चतरा: चतरा जिले के सिमरिया प्रखंड के फतहा गांव में कढ़ाई और जरी कारोबार से जुड़े कारीगर आज भुखमरी की कगार पर हैं. दिन-रात हाड़ तोड़ मेहनत करने के बाद भी इन्हें पूंजी तक वापस नहीं हो पा रही है. ऐसे में जहां कोरोना संक्रमण काल और लॉक डाउन अवधि में इनकी रोजगार की पूंजी टूटती जा रही है, वही दिन प्रतिदिन ये कर्ज में भी डूबते जा रहे हैं.

ये मजदूर दूसरे राज्यों में रहकर कारीगरी करते थे, लेकिन लॉक डाउन अवधि में इन्होंने अपने घर लौटकर यही रोजगार की शुरुआत की और अपने बेहतरीन हुनर की बदौलत बेमिसाल कढ़ाई तथा जरी युक्त कपड़े निर्मित करने में लगे हैं. सगे संबंधियों और स्थानीय लोगों से कर्ज लेकर इन्होंने काम भी शुरू किया लेकिन हाड़ तोड़ मेहनत और कारीगरी को अंजाम तक पहुंचाने के बाद भी आज यह कारीगर दूसरों के सामने हाथ फैलाने को विवश हैं.

कारण है इनके द्वारा निर्मित कढ़ाई और जरी युक्त कपड़ों का बड़े बाजारों तक नहीं पहुंचना. लॉकडाउन के कारण इन कारीगरों का रोजगार शुरू होने से पहले ही बंद होने के कगार पर पहुंच चुका है. लॉकडाउन की वजह से कढ़ाई तबका बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है. फतहा के कारीगर अपने गांव में ही रहकर कढ़ाई और जरी का काम करके हर महीने में 15 से 20 हजार रुपए का काम करते हैं. जिसका अन्य राज्यों से लेकर विदेशों में भी काफी डिमांड है. ऐसे में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन से कारीगरों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

चतरा जिले के फतहा गांव में लॉकडाउन से पहले करीब 50 से 60 कारीगर साड़ी, सलवार, सूट, दुपट्टा और ब्लाउज बनाने का काम करते थे लेकिन लॉकडाउन ने इन कढ़ाई कारीगरों का रोजगार लगभग छीन लिया. इन कारीगरों द्वारा बनाए गए सामान नहीं बिक रहे है. हालात यह है कि मजदूरों को अब पेट पालना भी मुश्किल हो चुका है. अब इन्हें सरकार से मदद की आस है.

कढ़ाई करने वाले कारीगर बताते हैं कि सरकार अगर उनकी मदद करे तो हमारे द्वारा बनाए गए सामान फिर विभिन्न राज्यों और राष्ट्रीय पटल पर कढ़ाई और जरी को नई पहचान दिला सकता है. लाखों का कारोबार करने वाले एक छोटे से कस्बे के कारीगरों का पिछले 2 महीनों से बनाया गया लाखों का सामान धूल फांक रहा है, वहीं लगभग 15 लाख का करोबार भी प्रभावित हुआ है. बस इंतजार है तो लॉकडाउन टूटने के बाद स्थिति सामान्य होने की. ऐसे में अब कढ़ाई कारीगरों और मालिक सरकार से मदद की गुहार लगा रहे है, ताकि फिर से चालू कर इस कारोबार को बढ़ा सकें.

हालांकि कारीगरों की समस्या से अवगत होने पर स्थानीय विधायक किशुन दास से हर संभव सरकारी मदद का भरोसा दिलाया है. कहा है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार कारीगरों के लिए खजाने का द्वार खोलने जा रही है. राहत पैकेज के माध्यम से कारीगरों को आर्थिक मदद पहुंचाया जाएगा.

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