बिहार (लखीसराय): दिल्ली में फंसे बिहार के प्रवासी मजदूरों-कामगारों को वापस भेजने के लिए केजरीवाल सरकार 100 ट्रेनों का किराया देने को तैयार है, लेकिन राज्य की नीतीश सरकार अब और ट्रेनों को अनुमति नहीं देना चाहती.
इधर दिल्ली के मुख्यमंत्री ने फिर बिहार के प्रवासियों से कहा है कि आप दिल्ली छोड़कर न जाएं. साथ ही यह भी भरोसा दिया है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद सबको नौकरी और रोजगार दिलाया जाएगा.
आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रवक्ता चंद्र भूषण और जिलाध्यक्ष अभिषेक कुमार ने एक बयान में यह जानकारी दी है. उल्लेखनीय है कि दिल्ली के विभिन्न शेल्टर होम में फंसे करीब 18,000 मजदूरों व कामगारों ने बिहार जाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था.
बाद में 8000 मजदूरों ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा अच्छी देखभाल और लॉकडाउन खत्म होने के बाद नौकरी व रोजगार मुहैया कराने के आश्वासन पर बिहार लौटने के आवेदन को वापस ले लिया है लेकिन करीब 10,000 मजदूरों- कामगारों ने बिहार लौटने की इच्छा जाहिर की है.
वे करीब 45 दिनों से शेल्टर होम में रह रहे हैं. दिल्ली से 10,000 में से 12 सौ-12 सौ लोगों को लेकर दो ट्रेन मुजफ्फरपुर के पहुंच चुकी हैं. यह भी उल्लेखनीय है कि इस ट्रेन का 6.5-6.5 लाख का अग्रिम किराया केजरीवाल सरकार ने चुका दिया है.
आप प्रवक्ता चंद्र भूषण ने कहा कि दिल्ली से अब कोई भी ट्रेन बिहार चलाने की अनुमति देने से नीतीश सरकार ने इंकार कर दिया है. उन्होंने अफसोस जारी करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के दौरान भी नीतीश जी अमानवीय दृष्टिकोण अपना रहे हैं और राजनीति कर रहे हैं.
इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नई अपील को दोहराते हुए आप प्रवक्ता ने कहा कि घर जाने के इच्छुक बिहार के प्रवासियों के लिए ट्रेन की व्यवस्था की जा रही है, घबराए नहीं, थोड़े दिन तक धर्य रखें.
उन्होंने यह भी कहा कि कंधे पर बच्चों, बूढ़ों को लेकर सड़क पर पैदल घर न जाएं, ऐसा देखकर तकलीफ होती है और यह खतरनाक भी है. ऐसा लगता है मानो सारा सिस्टम फेल हो गया है.
भूषण ने फिर लॉकडाउन की वजह से दिल्ली में फंसे बिहारी प्रवासियों को आश्वस्त किया है कि उनकी सुरक्षा खाने और रहने की जिम्मेदारी केजरीवाल सरकार की है.
उन्होंने यह भी कहा कि लॉकडाउन हमेशा नहीं रहेगा और जब भी खुलेगा सबको नौकरियां भी मिलेगी और सबको मजदूरी भी मिलेगी.
उधर बिहार प्रदेश प्रभारी और सांसद संजय सिंह ने प्रवासियों को लेकर भी बयान दिया है कि कोटा के छात्रों को बुलाया जा सकता है तो मजदूरों को उनके घर क्यों नहीं भेजा जा सकता? भाजपा नेताओं ने गुजरात में प्रवासी मजदूरों से टिकट का पैसा ले लिया और टिकट भी नहीं दी. मांगने पर बुरी तरह उन मजदूरों-कामगारों को पीटा. क्या यही है भाजपा का “गुजरात मॉडल?”

