रांची:- झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोरनाथ शाहदेव और राजेश गुप्ता छोटू ने भाजपा विधायक सह पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि प्रखंड में नाजिर रहने के बाद उनका राजनीतिक कद जैसे-जैसेबढ़ता गया है, उनकी संपत्ति में भी लगातार इजाफा होता गया. आज उनके नाम पर कई शैक्षणिक संस्थान, इंजीनियरिंग काॅलेज और मेडिकल काॅलेज और अस्पताल समेत अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठान हो गये, लेकिन जिस क्षेत्र से वे चुनाव जीत कर आते है, उस क्षेत्र का कोई विकास नहीं हुआ. वहीं उनके स्वास्थ्य मंत्री रहने के कारण राज्य के स्वास्थ्य विभाग का स्वास्थ्य खराब हो गया. उनके कार्यकाल में राज्य में स्वास्थ्य और चिकित्सा व्यवस्था की किस तरह की दयनीय स्थिति उत्पन्न हो गयी,यह बात किसी से छिपी नहीं है.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी कमेटी के प्रवक्ता अलोक कुमार दूबे ने कहा कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी कार्यकाल में राज्य के सरकारी अस्पतालों में न तो समुचित जांच की सुविधा थी और न ही वेंटिलेटर उपलब्ध था. गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन , वित्तमंत्री डाॅ. रामेश्वर उरांव और स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के नेतृत्व में वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण में हर प्रमंडलीय, जिला और प्रखंड मुख्यालयों तक जांच की सुविधा के साथ ही वेंटिलेटर और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी. गठबंधन सरकार की कोशिश के कारण ही कोविड-19 महामारी पर काफी हद तक अंकुश लग पाया है और स्वस्थ होने वाले मरीजों का प्रतिशत भी बढ़कर करीब 98 फीसदी पर पहुंच गया है.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता लाल किशोरनाथ शाहदेव ने कहा कि रामचंद्र चंद्रवंशी के कार्यकाल में रिम्स और सदर अस्पताल समेत अन्य सरकारी अस्पतालों के परिसर में भी मलेरिया और डेंगू मच्छर का लार्वा पाया था. हालात इतने खराब थे कि जमशेदपुर के सरकारी मेडिकल काॅलेज में दर्जनों बच्चों की कुपोषण के कारण मौत हो गयी थी. ऐसे में रामचंद्रचंद्रवंशी के हेमंत सोरेन सरकार पर सवाल उठाने की जगह पहले अपने गिरेबां में झांक कर देखना चाहिए.
प्रदेश प्रवक्ता राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि रामचंद्र चंद्रवंशी के कार्यकाल में स्वास्थ्य विभाग में जिस तरह से भ्रष्टाचार और अनियमितता थी, उसके कारण आज विभागीय व्यवस्था को दुरुस्त करने में काफी मेहनत करनी पड़ रही है.

