नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के तहत गुरुवार को 30 सीटों पर मतदान होगा जिसमें 75 लाख मतदाता 191 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे किंतु इस चरण में सबकी नजरें हाई प्रोफाइल नंदीग्राम सीट पर टिकी है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने पूर्व सहयोगी एवं भाजपा प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ मैदान में हैं.
तृणमूल कांग्रेस और भाजपा इस चरण की सभी 30 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि माकपा ने 15 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.
पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की 30 सीटों पर 19 महिलाओं सहित 171 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं, असम में दूसरे चरण की 39 सीटों पर 26 महिलाओं सहित 345 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.
· पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण के मतदान में शाम 4 बजे तक यहां 71.07 प्रतिशत मतदान हुआ है. · बंगाल और असम में वोटिंग ने रफ्तार पकड़ी, सुबह नौ बजे तक बंगाल में 15.72 फीसदी और असम में 10.51 फीसदी मतदान हुआ है. मतदान के शुरुआती एक घंटे का आंकड़ा में बंगाल में 0.56 फीसदी और असम में 1.00 फीसदी मतदान हुआ है.
· चुनाव आयोग के अनुसार, दूसरे चरण में सुबह 9 बजे तक असम में 10.51 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 13.14 फीसदी वोटिंग हुई.
· खड़गपुर सदर से बीजेपी प्रत्याशी एक्टर हिरन चटर्जी ने एक पोलिंग स्टेशन पहुंच कर कहा, ‘लोग यहां विकास चाहते हैं. हमें एक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और महिलाओं का कॉलेज चाहिए. लोग बड़ी संख्या में वोट डालने आए हैं.’
· वहीं नंदीग्राम में बाइक पर बैठकर बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी वोट डालने पहुंचे. अधिकारी ने कहा कि उनकी जीत पक्की है. उन्होंने मतदाताओं से वोट करने की अपील की.
· भारती घोष ने कहा, पोलिंग बूथ के अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है. बरुनिया में वोटर्स को धमकाया जा रहा है और टीएमसी सिंबल दिखाया गया.
· वहीं नंदीग्राम में टीएमसी ने बीजेपी पर कई बूथों पर व्यवधान खड़ा करने का आरोप लगाया है. वहीं डेबरा से बीजेपी उम्मीदवार भारती घोष ने कहा, नौपारा क बूथ नंबर 22 में मेरे पोलिंग एजेंट को टीएमसी के गुंडों ने घेर लिया है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गैरभाजपा दलों के नेताओं को चिट्ठी लिख कर लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) कानून को लेकर लिखी गई इस चिट्ठी में ममता ने आरोप लगाया कि एक चुनी हुई सरकार को शक्तिहीन कर भाजपा उपराज्यपाल के जरिए दिल्ली की सत्ता संचालित करना चाहती है. यही फारमूला वह हर गैरभाजपा शासित राज्यों में राज्यपालों के जरिए अपना रही है.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, नवीन पटनायक, जगनमोहन रेड्डी से लेकर तमाम गैरभाजपा दलों के प्रमुखों को लिखी गई यह चिट्ठी वैसे 28 मार्च की है, लेकिन सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हुई बुधवार को. वीरवार को पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान है. इसी चरण में नंदीग्राम में भी वोट पड़ेंगे, जहां से ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही हैं. सियासी गलियारे में इस पत्र की टाइमिंग को लेकर चर्चा गरम है. यह पत्र ऐसे वक्त में सामने आया है, जब महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार पर खतरा मंडराया हुआ है.
जब, अहमदाबाद में शरद पवार-प्रफुल्ल पटेल की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से कथित मुलाकात हो चुकी है. जब, शरद पवार पश्चिम बंगाल का अपना दौरा रद्द कर अस्वस्थता के चलते अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं. जब, पश्चिम बंगाल का किला फतह करने को भाजपा ने अपनी सारी ताकत लगा रखी है और पहले चरण की 85 फीसद सीटें जीतने का दावा कर चुकी है.
यही कारण है कि इसके सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं. क्या ममता किसी संभावित घटनाक्रम को लेकर घबराई हुई हैं, इस सवाल का जवाब ममता की में तलाशनी होगी. उन्होंने लिखा कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा लोकतंत्र और संवैधानिक संघवाद पर लगातार हमले कर रही है. इसका सबसे ताजा उदाहरण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) विधेयक (एनसीटी दिल्ली बिल) है. भाजपा सरकार ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई एक सरकार की शक्तियां छीन कर केंद्र द्वारा नियुक्त उपरायपाल के हाथों में दे दी.
उपराज्यपाल को दिल्ली का वायसराय बना दिया गया जो केंद्रीय गृहमंत्री और प्रधानमंत्री के प्रॉक्सी की तरह काम करेंगे. जनता के फैसले को दरकिनार कर दिल्ली पर राज करने के लिए भाजपा उपराज्यपाल को मुख्यमंत्री का विकल्प बना रही है. उन्होंने कहा कि एनसीटी दिल्ली (संशोधन) विधेयक संघीय ढांचे पर सीधा हमला है.
सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ द्वारा 2018 में दिए गए फैसले का उल्लंघन है. ममता ने लिखा कि यह केवल दिल्ली के साथ ही नहीं किया गया है. एक के बाद एक गैरभाजपा शासित राज्यों में केंद्र लगातार राज्यपाल कार्यालय का इस्तेमाल कर दिक्कतें खड़ी की जा रही है.
पश्चिम बंगाल में भी राज्यपाल कार्यालय भाजपा दफ्तर की तरह काम कर रहा है. यही नहीं, केंद्र की भाजपा सरकार प्रतिशोध की भावना से सीबीआई, ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को गैर भाजपा नेताओं और पदाधिकारियों के खिलाफ इस्तेमाल कर रही है.
चुनाव के दौरान भी पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में टीएमसी एवं डीएमके नेताओं के यहां पड़ रहे ईडी के छापे इसके उदाहरण हैं. ये छापे केवल गैरभाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं के यहां पड़ते हैं, किसी भाजपा नेता के यहां नहीं. मोदी सरकार गैर भाजपा शासित राज्यों का अनुदान रोक रही है, जिसके चलते विकास जनकल्याणकारी योजनाओं को चलाने और विकास परियोजनाओं को संचालित करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
राष्ट्रीय विकास परिषद, अंतर-राज्यीय परिषद और योजना आयोग (अब नीति आयोग) जैसे मंच शक्तिहीन-दंतविहीन कर दिए गए हैं, जहां राज्यों के प्रतिनिधि केंद्र के सामने अपनी मांगें रखते थे. विनिवेश के नाम पर सार्वजनिक उपक्रमों की बिक्री और निजीकरण भी लोकतंत्र पर हमला है, क्योंकि ये देश की जनता की संपत्ति हैं.
उन्होंने लिखा कि केंद्र-राज्य और सरकार-विपक्ष के संबंध आज जितने खराब हैं, आजाद भारत के इतिहास में कभी ऐसा नहीं रहा. भाजपा राज्य सरकारों और विपक्ष को कमजोर कर देश में एक दलीय सत्ता स्थापित करना चाहती है.

