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मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद मदरसा व संस्कृत शिक्षकों का विधानसभा घेराव स्थगित

by bnnbharat.com
March 17, 2021
in समाचार
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रांची:- राज्य के गैर सरकारी सहायता प्राप्त 186 मदरसों की भौतिक सत्यापन के नाम पर शिक्षा विभाग द्वारा बार बार जाँच का आदेश  के विरोध में और पेंशन व बकाया वेतनादि की भुगतान  की मांग को लेकर झारखंड प्रदेश मदरसा व संस्कृत शिक्षक समन्वय समिति द्वारा 18 मार्च से आहूत विधानसभा घेराव को स्थगित कर दिया गया है.

इस संबंध में समिति के महासचिव हामिद ग़ाज़ी ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा आश्वासन मिलने के बाद मदरसा व संस्कृत शिक्षक समन्वय समिति के पदाधिकारियों की बैठक हुई जिस में मौलाना मो0 रिज़वान क़ासमी, शरफुद्दीन रशीदी, मौलाना सलाहुद्दीन मज़ाहिरी, मौलाना शुजाउल हक़,जितेन्द्र पाण्डे, राजहंस पांडेय आदि उपस्थित  थे. बैठक में  विधानसभा घेराव स्थगित करने का निर्णय लिया गया . उन्होंने ने बताया कि मुख्यमंत्री से आवश्वासन मिला है कि राज्य के मदरसा व संस्कृत विद्यालयों को अनावश्यक परेशान नही किया जाएगा. उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा मदरसों की पांचवीं बार जाँच का आदेश निकाला गया है जिसका हमलोगों ने विरोध किया है, इसकी भी जानकारी मुख्यमंत्री दे दी गयी है. मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि मानक मण्डलों को पूरा करने वाले मदरसों की पुनः जांच नही होगी. उन्होंने कहा है कि हमारी सरकार ने ही मदरसा व संस्कृत कर्मियों को 2014 में पेंशन देने का निर्णय लिया था , जिसे पिछले भाजपा की सरकार ने उसे रद्द कर दिया अब पुनः हमारी सरकार ही मदरसा व संस्कृत कर्मियों को पेंशन देने पर जल्द मुहर लगाएगी.

ज्ञात हो कि  इस संबंध में कई मंत्रियों और विधायकों ने भी शिक्षा विभाग को पत्राचार किया है लेकिन अफसोस कि बाद है कि शिक्षा विभाग में बैठे अधिकारियों के द्वारा मंत्रियों और विधायकों की शिफारिश को भी दबा दिया जाता है. 

हामिद ग़ाज़ी ने कहा कि सरकार ने मंत्री परिषद की बैठक में  186 मदरसों की शिक्षकों के 3 साल के बकाया वेतन भुगतान का निर्णय लिया था इसके लिए अनुपूरक बजट भी पास किया गया. लेकिन शिक्षा विभाग में बैठे अधिकारियों की तानाशाही के कारण अब तक सिर्फ 1 ही साल का बकाया वेतन का भुगतान हो सका है. शिक्षा विभाग के इस पक्षपात रवैया से मदरसा शिक्षकों में काफी नाराजगी है. उन्होंने कहा है कि बजट रहते हुए भी वेतन भुगतान नहीं कर उसे लैप्स करा देना कहाँ तक उचित है.

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