आलोक कुमार,
प्रशासन और वन विभाग से नाराज ग्रामीणों ने कहा- सहानुभूति के नाम पर चावल देना बंद करे प्रशासन
सिमडेगा(जलडेगा): जलडेगा में जंगली हाथियों का उत्पात कम होने का नाम नहीं ले रहा है. कभी किसी के घर को तो तोड़ रहे है, तो कभी किसी के घर में रखे अनाज को हाथी खा जाते है. जंगलों से सटे इलाकों में रहने वाले गरीब आदिवासी लगातार प्रशासन से गुहार लगा रहे है कि जंगली हाथियों के उत्पात से हमारी घरों की रक्षा कीजिए. बाबजूद इसके प्रशासन के कानों तक जुं तक नहीं रेंग रही है.
ग्रामीणों का कहना है कि सहानुभूति के नाम पर चावल देने से कुछ नहीं होगा, वन विभाग सिर्फ मुआवजा देने के लिए है, हाथियों की खबर मिलने पर भी कोई हाथियों को भागने के दिशा में काम नहीं कर रहे हैं. जिसके लिए ग्रामीणों में रोष है, डर-डरकर जीने को विवश हैं. ग्रामीणों ने कहा कि घर मेहनत से बनता है, मुआवजा के पैसे से नहीं इसलिए वन विभाग हाथी को भगाने की दिशा में काम करे.

वहीं बता दें कि जलडेगा प्रखंड के लम्बोई पंचायत अंतर्गत खिजुरबेड़ा निवासी सोमरा सुरीन की, जिसके घर को पिछले दिन जंगली हाथी ने सुबह करीब 4.30 बजे ध्वस्त कर दिया. सोमरा सुरीन घर में सो रहा था कि अचानक घर को तोड़ने की आवाज सुनाई दी और वो किसी तरह जान बचाकर भागा वहां से भागा.
सोमरा सुरीन ने बताया कि घर में रखे लगभग 5 क्विंटल धान को हाथी खा गया. इधर, प्रशाशन को सूचना मिलने पर लम्बोई पंचायत सचिव दिनेश ओहदार और स्वयं सेवक विनय कंडूलना ने 18 किलो चावल दिया.

