रांची: मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि एक अखबार में प्रकाशित बंधन तिग्गा के ब्यान से सरना व सनातन धर्म मानने वालों के आस्था पर आघात हुआ है. उन्होंने कहा कि बंधन तिग्गा को खुद नहीं पता होगा कि वे किस धर्म से आते हैं. उनके परिवार में अलग-अलग समाज के लोग हैं. सरना समाज में धर्मगुरु नहीं होते हैं. पहान, पुजार ही पूजा-पाठ व शादी-विवाह कराते हैं. बंधन तिग्गा सरना धर्म मानने वालों के न तो धर्मगुरु हैं और न ही सरना धर्म मानने वाले व्यक्ति हैं.
अखबार में प्रकाशित बंधन तिग्गा के बयान का खंडन करते हुए मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि किसी भी सरना स्थल में आज तक बछिया की बलि नहीं दी गई है. राजनीतिक षड्यंत्र के तहत सत्ता पक्ष में बैठे कुछ लोगों के इशारे पर तथाकथित धर्म गुरु के माध्यम से इस प्रकार का बयानबाजी कराया जा रहा है कि सरना स्थल में तीन वर्ष में एक बार बछिया का बलि दिया जाता है. यह सरासर गलत है.
उन्होंने कहा कि बंधन तिग्गा के इस बयान से सरना धर्म मानने वालों की आस्था को ठेस पहुंचा है. ऐसे व्यक्ति को समाज में जगह देने की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति, जो किसी वर्ग विशेष की धार्मिक आस्था को गलत बयानबाजी कर उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का काम कर रहे हैं, वैसे लोगों को धर्म गुरु के नाम पर सम्मान न दें. उन्होंने कहा कि धर्म गुरु किसी वर्ग विशेष की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने का काम नहीं करते हैं. ऐसे व्यक्ति से न सिर्फ सामाजिक दूरी बनाने की आवश्यकता है बल्कि उसे सामाजिक स्तर पर दंडित किया जाना भी आवश्यक है, ताकि समाज को तोड़ने की दिशा में काम करने वाला कोई भी व्यक्ति इस प्रकार का काम न करे.
आशा लकड़ा ने कहा कि बंधन तिग्गा के परिवार में उनके सास, ससुर व पत्नी विभिन्न समाज से आते हैं. यह हमारा दुर्भाग्य है. सरना व सनातन धर्म मानने वाले लोग ऐसे व्यक्ति का बहिष्कार करें. हमारे धर्म में गाय मां समान है. हम सभी गो माता की पूजा करते हैं. आदि व सरना धर्म मानने वाले लोग शिव-पार्वती की पूजा करते हैं. सरना व कर्म पूजा करते हैं. किसी पूजा या अनुष्ठान में बछिया बलि की प्रथा नहीं है.

