नीता शेखर,
“जिंदगी एक खूबसूरत आस है, गमों के साए में ना इसे डुबाया करो, ना जाने जिंदगी की शाम में कब अंधेरा आ जाए, उसके पहले हर पल मुस्कुराया करो.
कहते हैं दुख और सुख तो जीवन का हिस्सा है. इंसान तो ऐसा प्राणी है जो चलता है गिरता है फिर उठ खड़ा होता हो जाता है. एक ऐसे ही परिवार की कहानी है. घर में दुख तो बहुत आया पर उसने हिम्मत नहीं हारी.
रमेश की कहानी सुनाती हूं. वो दो भाई और छह बहन थे. उसके बाबूजी काफी अच्छी नौकरी करते थे. सब कुछ होते हुए उनमें एक ही खराबी थी पीने की. उसके साथ ही साथ सिगरेट पीने की. उसकी वजह से कई बार उनको परेशानियों का सामना करना पड़ता था पर वह शराब छोड़ ही नहीं पाते थे. लोगों ने काफी समझाया पर वह किसी की नहीं सुनते. इसका नतीजा यह हुआ कि उनकी तबीयत खराब रहने लगी. फिर क्या था हालात दिन पर दिन खराब होते चले गए. केवल दो बहनों की शादी हुई थी. बड़े भाई की शादी भी हो चुकी थी. वह अपने परिवार के साथ बेंगलुरु में रहते थे. एक दिन उनके पिताजी का देहांत हो गया.
अब तो सारे घर की जिम्मेदारियां रमेश पर आ पड़ी थी. पढ़ने में बहुत तेज था. उन्हें जल्द ही बैंक में नौकरी मिल गई. उनकी गृहस्थी रास्ते पर चल पड़ी थी लेकिन उनके ऊपर बहुत सी जिम्मेवारी आ गई थी. चार चार बहनों की शादी और फिर मां की जिम्मेवारी पर वह हमेशा मुस्कुराया करते थे. हमेशा हंसते रहते थे. उनके चेहरे पर कभी शिकन नहीं हुआ करती थी. हां उन्होंने दो चीजों से अपने आप को बिल्कुल अलग कर रखा था. उन्होंने प्रण कर लिया था चाहे कुछ भी हो जाए शराब को हाथ नहीं लगाएंगे. यह सबक उन्होंने अपने पिताजी को देख कर लिया था.
देखते देखते तीन बहनों की शादी हो गई. कुछ दिनों में मां का भी देहांत हो गया. दोनों भाई-बहन साथ रहते थे. अब लोगों ने समझाना शुरू किया. पहले तुम शादी कर लो फिर बहन की करना. काफी समझाने के बाद तैयार हो गए. खैर देखते-देखते उनकी शादी हो गई. लड़की भी काफी अच्छी काफी पढ़ी लिखी थी. बहन की भी शादी हो गई. अब हंसी खुशी से उनका परिवार चल रहा था. इसी बीच दो बच्चे भी हो गए थे. काफी खुशहाल किस्म के आदमी थे. उनको अपने बच्चों और परिवार से काफी लगाव था. बीवी ने कॉलेज ज्वाइन कर लिया था लेकिन कहते हैं ना कि जिंदगी कब रास्ता बदल दे कोई नहीं जानता. घर में दीदी की बड़ी लड़की की शादी ठीक हो गई. शादी की तैयारियां जोर-शोर से हो रही थी. इसी बीच उनकी बेटी क्लास 12 वीं कक्षा और बेटा दसवीं कक्षा में आ गया था. शादी खत्म होने पर हम सब वापस आ गए, दोनों बच्चों की परीक्षा दो दिन बाद शुरू होने वाली थी.
अचानक अगले दिन 10:00 बजे फोन की घंटी बज उठी. मैंने फोन उठाया. उधर से उनके भगिने की आवाज थी, मामी मामू नहीं रहे. क्या ? मैंने उनको जोर से डांट दिया. अरे कल ही तो आए हैं उनके यहां से. उन्होंने कहा मैं सच कह रहा हूं. मामू नहीं रहे. मेरी बोलती बंद हो गई. हम सब यही सोच रहे थे ऐसा कैसे हो सकता जिस इंसान से कल ही मिल कर आए हैं उसको कोई परेशानी भी नहीं थी. उसके साथ ऐसा कैसे हो सकता है. पर कहते हैं ना जो होना रहता है वही होता है, फिर हम सब वापस उनके घर पहुंचे देखा तो वहां का दृश्य देखकर दिल दहल उठा.
कहते हैं सीवियर हार्ट अटैक हुआ था, दुख से माहौल गमगीन हो गया था. जिस इंसान ने कभी शराब और सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया था उसके साथ ही ऐसा हो गया. उनके बच्चे परीक्षा देने के लिए तैयार नहीं थे फिर सबने समझाया कहा देखो तुम्हारे पापा का सिद्धांत था. वह जीवन में कहते थे हर पल खुश रहो. जिंदगी कब बदल जाए कोई नहीं जानता. इसलिए जो जिंदगी मिली है उसको हर पल मुस्कुरा कर जियो.कोई नहीं जानता जिंदगी में कब अंधेरा आ जाए.
ऐसे जिंदादिल और संघर्षरत इंसान को शत-शत नमन. आज उनके बच्चे बड़े हो गए है पर नियति कभी किसी को नहीं छोड़ती. कभी किसी का पीछा नहीं छोड़ती. उनके बच्चे ने भी सब कुछ होते हुए भी अपने पिता के साथ को गंवा दिया.


