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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान ने लड़कियों के प्रति समाज की सोच बदली, 27 टॉपर्स में 22 बेटियां शामिल

by bnnbharat.com
July 11, 2020
in Uncategorized
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान ने लड़कियों के प्रति समाज की सोच बदली, 27 टॉपर्स में 22 बेटियां शामिल
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रांची: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर देश में चले ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान’ का अब परिणाम भी दिखने लगा है. बेटियां अब सिर्फ पढ़ ही नहीं रही हैं, बल्कि टॉपर्स लिस्ट में मुकाम बना कर घर परिवार की शान भी बढ़ा रही है. झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा संचालित मैट्रिक परीक्षा में रांची के डोरंडा पारसटोली की रहने वाली सीमाब जरीन ने 97 प्रतिशत अंक लाकर जिले में टॉप किया है. इतना ही नहीं रांची में शीर्ष 27 टॉपर्स में 22 लड़कियां शामिल हैं.

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत पांच साल पहले वर्ष 2015 में हुई थी. इन पांच वर्षों में यह अभियान समाज में बड़े बदलाव का वाहक बन चुका है. बेटे बेटियों में फर्क की दकियानूसी सोच से ऊपर उठकर अभिभावक केंद्र सरकार के सहयोग से अपनी बेटियों को भी शिक्षा का सामान अवसर उपलब्ध करा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं.

सीमाब जरीन के घर में आजकल जश्न का माहौल है. बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. घर में यह खुशी का पल एक बेटी की वजह से नसीब हुआ है, जिससे उनके माता पिता फूले नहीं समा रहे हैं. सीमाब जरीन के पिता शाहिद इकबाल कैटरिंग का काम करते है. बावजूद इसके उन्होंने लड़कियों को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. उनकी मां का भी मानना है कि बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान से लड़कियों के प्रति समाज की सोच बदली है.

सीमाब जरीन की चाह डॉक्टर बनने की है, ताकि वे इसके जरिए दीन दुखियों की सेवा कर सकें. अपनी कामयाबी का श्रेय माता-पिता, गुरूजनों और ईश्वरीय कृपा को देते हुए वे कहतीं हैं कि‍ तरीके से पढ़ाई करने से सफलता कदम चूमती है.

सीमाब के घर की खासियत यह है कि उसके परिवार में लड़कियों को भी अपना भविष्य गढ़ने का पूरा मौका दिया जाता है. सीमाब से बड़ी दो बहनें बी-टेक है, जबकि एक ने एमबीए किया है. सीमाब जरीन के बारे में तो अभी यही कहा जा सकता है कि

जिन्दगी की असल उड़ान अभी बाकी है. अभी तो नापी है मुठ्ठी भर जमीन हमने अभी तो सारा आसमान बाकी है.

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