रांची: रांची पुलिस ने एक बड़े नटवरलाल को दबोचा है, जिसने लग्जरी गाड़ी, बॉडीगार्ड और प्रोजेक्ट भवन की ठसक दिखा 30 लाख रुपये की ठगी की है. इस मामले के अलावा भी 70 लाख से ज्यादा ठगी के मामले सामने आए हैं.
30 लाख की ठगी का मामला पिठोरिया थाने में दर्ज है. जबकि 70 लाख ठगी का मामला धुर्वा थाने में दर्ज है. पकड़े गए आरोपित का नाम निवेश कुमार उर्फ निवेश पोद्दार है. वह खुद को प्राजेक्ट भवन का अधिकारी बताता था, अपना पद नीति सलाहकार बताया करता था.
पिठोरिया के एक बुजुर्ग शिवदास शर्मा से आरोपित ने ठगी कर ली है. इसे लेकर पिठोरिया निवासी शिवदास वर्मा ने पिठोरिया थाना में प्राथमिकी (80/2020) दर्ज कराई थी.
इस मामले में पिठोरिया पुलिस ने छापेमारी कर धुर्वा थाना क्षेत्र से आरोपित निवेश कुमार पिता सुभाष कुमार को गिरफ्तार कर लिया है.
पीड़ित के अनुसार, उन्हें निवेश कुमार से परिचय पिठोरिया निवासी रूपेश स्वर्णकार व राजेश साहु ने करवाया था. निवेश कुमार भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड से पेट्रोल पंप दिलाने के लिए शिवदास वर्मा से 30 लाख सत्तर हजार रुपये लिया.
तय समय पर पेट्रोल पंप नहीं मिलने पर शिवदास वर्मा रुपये की मांग करने लगे. इस बीच रूपेश स्वर्णकार दो किस्त में पांच लाख रूपया शिवदास वर्मा को लौटा दिया. बचे हुए 25 लाख 70 हजार रुपये लौटाने के लिए निवेश कुमार ने शिवदास वर्मा से लिखित एग्रीमेंट किया.
इस पर भी तय समय से निवेश कुमार रुपये नहीं लौटाया. इस केष में पूर्व में राजेश साहु को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है. निवेश कुमार के विरूद्ध रांची जिला के अलग-अलग थानों में ठगी का मामला दर्ज है. पुलिस आरोपित से पूछताछ कर रही है.
पीड़ित शिवदास वर्मा ने एफआईआर में बताया है कि विगत वर्ष 2 मई 2019 को निवेश कुमार पिता सुभाष कुमार से प्रोजेक्ट भवन धुर्वा में ही मुलाकात हुई थी. मुलाकात के दौरान निवेश कुमार बोला कि मैं यहां प्रोजेक्ट भवन में नीति सलाहकार के पद पर कार्यरत हूं.
आपको पेट्रोल पंप खोलना है तो मैं भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड का पेट्रोल पंप दिलवा सकता हूं. और उसी दिन प्रोजेक्ट भवन में ही एक आवेदन पेट्रोल पंप स्थापित के संबंध में लिखवा कर लिया. उसके बाद फोन से संपर्क कर मुलाकात करने लगा. उसके साथ एक अन्य व्यक्ति भी थे जिसे वह भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड का रिजनल मैनेजर बोलता था.
उसके बातों पर विश्वास करके नोजल, टंकी, डीजल, पेट्रोल एवं अन्य खर्च के नाम से 21 मई 2019 से लेकर 9 सितंबर 2019 तक 30 लाख 70 हजार नगद निवेश कुमार को दिया. इस बात का गवाह मेरे गांव के पिठोरिया निवासी रूपेश स्वर्णकार और राजेश साहू भी हैं.
बाद में निवेश कुमार पर शक होने लगा इसके बाद अपने पैसे लौटाने की जिद करने लगा. इसबीच 24 दिसंगर 2019 को रुपेश स्वर्णकार के हाथों पांच लाख रुपये लौटाया. इसके बाद फरार हो गया.

