रांची: भारतीय जनता पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव डीके तिवारी से मंत्रालय में मिलकर शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन द्वारा गलत तरीके से छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 46 का उल्लंघन करते हुए डीड के जरिए सैकड़ों एकड़ भूमि का गैर वाजिब हस्तांतरण के जांच कराए जाने से संबंधित आवेदन सौंपा. प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव से इस मामले में जांच का अनुरोध किया है. प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि शिबू सोरेन व हेमंत सोरेन द्वारा गलत तरीके से जमीन ली गई. जबकि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 46 कहती है कि एक आदिवासी संबंधित उपायुक्त की अनुमति से दूसरे आदिवासी की भूमि का क्रय कर सकता है बशर्ते कि वह विक्रेता के थाना क्षेत्र का निवासी हो. जबकि शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन ने ऐसा नहीं किया.
33 डीड के जरिए सैकड़ों एकड़ भूमि खरीदी
प्रतिनिधिमंडल ने अपने आवेदन में लिखा है कि शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन, कल्पना मुर्मू, सीता मुर्मू, बसंत सोरेन एवं स्वर्गीय दुर्गा सोरेन के नाम से सैकड़ों आदिवासी भूखंड राज्य के विभिन्न जिलों में खरीदे गए. हेमंत सोरेन परिवार द्वारा 33 डीड के जरिए संपूर्ण राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में भूमि खरीदी गई है, जो सीएनटी एक्ट की धज्जियां उड़ाता है. साथ ही जमीन का हस्तांतरण इसलिए भी अवैध है क्योंकि सोरेन परिवार ने समय-समय पर अपने स्थानीय निवासी होने के बारे में गलत सूचनाएं दी है.
प्रतिनिधिमंडल में सांसद समीर उरांव, विधायक रामकुमार पाहन, दीपक प्रकाश और प्रदीप वर्मा व अन्य शामिल थे.

