खास बातें:-
👉झारखंड ने संघर्ष करना सीखा है, अपने अधिकारों को हम लड़कर लेंगे.
👉राज्य का लगभग 74,000 करोड़ रूपये बकाया केंद्रीय संस्थानों पर है.
रांचीः सीएम हेमंत सोरेन ने कहा है कि केंद्र सरकार सुनियोजित तरीके से झारखंडियों के हक-अधिकार पर हमला कर रही है. गरीबों-वंचितों पर कुदृष्टि इनकी हारी हुई मानसिकता को दिखाती है. पिछले दिनों झारखंड से बिना पूछे यहां के कोयला खदानों की नीलामी शुरू करने की कोशिश की गई.
डीवीसी पर 5000 करोड़ का बकाया लाद कर राज्य को गिरवी रखने का काम भाजपा ने किया, लेकिन इस कोरोना की संकट में केंद्र ने रात के अंधेरे में झारखंड के 1400 करोड़ रुपये काट लिये. जबकि हकीकत यही है कि आंध्र प्रदेश एवं महाराष्ट्र जैसे राज्यों पर 50-50 हजार से अधिक का बकाया है.
हेमंत ने कहा कि राज्य का लगभग 74,000 करोड़ रूपये बकाया केंद्रीय संस्थानों पर है, लेकिन इसपर बीजेपी नेताओं ने कभी भी आवाज नहीं उठाया. इससे भी नहीं हुआ तो दुमका, पलामू, हजारीबाग के मेडिकल कॉलेजों की एनएमसी के माध्यम से वह मान्यता हटाने पर तुली है.
झारखंड में एम्स अभी बना भी नहीं हैं, मगर वहां मान्यता मिली हुई है. आखिर इसका क्या अर्थ है? हार से बौखलाई व डरी हुई बीजेपी चाहे जो चाहे कर लें, लेकिन हमारी सरकार मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे बच्चों की जिंदगी को ऐसे ही बर्बाद नहीं होने देगी. अपने अधिकारों के लिए जो भी जायज कदम उठाने होंगे, हम उठायेंगे. झारखंड ने संघर्ष करना सीखा है. अपने अधिकारों को हम लड़कर लेंगे.

