रांची:– झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सह राज्य के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा है कि रांची और राज्य के अन्य स्थानों पर भाजपा नेताओं को किसान सम्मेलन का ढोंग करने की बजाय सिंधु बॉर्डर, एनएच-24 और दिल्ली सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों से बातचीत कर समस्या का हल निकालना चाहिए.
डॉ. उरांव ने कहा कि जिस तरह से भाजपा नेता किसान आंदोलन की अनदेखी कर अपने निहित स्वार्थ में पूरे आंदोलन की दिशा को बदलने या किसानों के बीच फूट डालने की कोशिश कर रहे है, उससे अच्छा होता है कि प्रदेश भाजपा के नेता-कार्यकर्त्ता अपने केंद्रीय नेतृत्व को यह सुझाव देते कि जिनके लिए कानून बनाया गया है, उनकी बातों को भी सुन लेना चाहिए. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार को किसी भी कानून को बनाने के पहले, उनके साथ जरूर विचार कर लेना चाहिए, जिनके लिए कानून बनना जा रहा है, लेकिन भाजपा कभी ऐसा नहीं करती,किसी और के कहने पर कानून तो बना लेती है, लेकिन जनविरोध के कारण वह सफल नही हो पाती है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कृषि कानून लोकतंत्र की भावनाओं के अनुरूप नहीं है, यही कारण है कि किसान सड़कों पर है, अपनी मांगों को लेकर कई दिनों से आंदोलनरत है.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने भी भाजपा नेताओं के किसान सम्मेलन को ढांग करार देते हुए कहा कि देश के किसान अब भाजपा के झांसे में आने वाले नहीं है. उन्होंने कहा कि देश के लिए यह काफी दुःखद स्थिति है कि अन्नदाता किसान जो देश का पेट पालता ै, आज अपनी फसल का समर्थन मूल्य पाने के लिए सड़कों पर संघर्षरत है.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि भाजपा नेता किसान सम्मेलन और चौपाल का आयोजन करने के बजाय यह बताये कि जब मंडियां खत्म हो जाएगी, तो किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य कौन देगा. उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री बार-बार बोल रहे है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलता रहेगा, तो फिर इसे कानूनी रूप से अमलीजामा पहनाने से पीछे क्यों हट रही है, यही कारण है कि केंद्र सरकार की मंशा पर किसानों को संदेह है.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि जब से केंद्र में भाजपा की सरकार बनी है, किसानों की हालात दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि दर मुद्रार्स्फीति की तुलना में कम है और अब न्यूनतम समर्थन मूल्य को ही खत्मक रने की साजिश हो रही है, जबकि डीजल , खाद और कीटनाशकों की कीमत में लगातार बढ़ोत्तरी होती जा रही है.

