रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोरनाथ शाहदेव और राजेश गुप्ता छोटू ने विधायक नवीन जायसवाल और रणधीर सिंह द्वारा सरकारी आवास को खाली किये जाने को लेकर अड़ियल रवैये को एक गलत राजनीतिक परंपरा की शुरुआत करार दिया है.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने कहा कि पूर्व वर्ती रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में भाजपा विधायक नवीन जायसवाल को एक ओर जहां राजधानी में आवास बोर्ड के एक भूखंड पर भी कब्जा मिल गया और नियम विरुद्ध उनके द्वारा उस भूखंड पर रास्ता निकालने का भी आरोप लगा.
वहीं विधायक होने के नाते उन्हें एक सरकारी र्क्वाटर मिलना तय था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने सारे नियमों की अनदेखी कर उन्हें मंत्री को आवंटित किये जाने वाला एक बड़ा बंगला ही उपलब्ध करा दिया गया. यह इनाम उन्हें पिछली बार झाविमो से दलबदल कर भाजपा में शामिल होकर गठबंधन सरकार को मजबूती प्रदान करने के एवज में मिला, वे मंत्री पद की आस में भी अंतिम तक रघुवर दास की शोभा बढ़ाते रहे, लेकिन अंततः उन्हें निराशा ही हाथ लगी.
इसके बाद विधानसभा चुनाव में जब नयी सरकार आयी, तो नियमानुसार वरीयता के दृष्टिकोण से नवीन जायसवाल को आवंटित बंगले को पूर्व मंत्री हाजी हुसैन अंसारी को सौंप दिया गया, लेकिन नवीन जायसवाल की जिद के आगे प्रशासन द्वारा जब तक कोई कार्रवाई किया जाता, उससे पहले ही मंत्री हाजी हुसैन अंसारी की दुःखद मौत हो गयी, परंतु अब तक नवीन जायसवाल अदालत की आड़ में सरकारी बंगले को खाली करने में अड़गेबाजी में लगे है.
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश और विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी को नवीन जायसवाल और रणधीर सिंह का बचाव करने की जगह उन्हें अपने विधायकों को तत्काल आवास खाली करने का निर्देश देना चाहिए.
उन्होंने कहा कि चोरी भी और सीनाजोरी भी एक साथ नहीं चल सकती, इन दोनों विधायकों के आचरण को राज्य की जनता एक वर्ष से देख रही है, उनके इस गैर जिम्मेदाराना रवैये की राज्य की जनता भर्त्सना कर रही है. इसलिए अब प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करें, उससे पहले अपनी इज्जत और क्षेत्र की जनता के सम्मान का ख्याल रखते हुए उन्हें आवंटित दूसरे मकान में शिफ्ट हो जाना चाहिए.
भाजपा नेताओं को यह भी याद रखना चाहिए कि किस तरह से कोरोना काल में दिल्ली में कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी के आवास को खाली कराया था, वहीं जिस परिवार के दो-दो सदस्यों और पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या कर दी गयी, उस परिवार से एसपीजी सुरक्षा भी छीन ली गयी.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता लाल किशोरनाथ शाहदेव ने कहा कि पूर्व मंत्री रणधीर सिंह भी अब सिर्फ विधायक ही रह गये है, लेकिन वे भी मंत्री बंगले में ही जिद्द में अड़े है. जबकि नियमानुसार यह बंगला वरिष्ठ जेएमएम विधायक और प्रदेश 20 सूत्री कार्यक्रम किर्यान्वयन समिति के उपाध्यक्ष प्रो. स्टीफन मरांडी को आवंटित किया गया है.
इसके बावजूद रणधीर सिंह खुद की वरीयता का हवाला दे रहे है, जबकि यह सभी को पता है कि संसदीय राजनीतिक व्यवस्था में प्रो. स्टीफन मरांडी सीनियर है या रणधीर सिंह. उन्होंने कहा कि जब प्रशासन की टीम उनके सरकारी आवास को खाली कराने पहुंची, तो उस वक्त उनकी ओर से कहा गया कि सामान पैक किया जा रहा है, कुछ वक्त दिया जाए, लेकिन थोड़ी ही देर उनकी फिर यह बयान आता है कि अभी वे आवास नहीं खाली करेंगे, यह दुर्भाग्यपूर्ण है.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि जिस तरह से बीजेपी विधायक रणधीर सिंह और नवीन जायसवाल ने सरकारी आवास को लेकर एक गलत परंपरा की शुरुआत की गयी है, कहीं से भी उचित नहीं है, इसलिए दोनों को तत्काल अपने सरकारी आवास को खाली कर देना चाहिए.

