रांचीः भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के द्वारा मैनहर्ट की फिर से जांच कराने पर पलटवार किया।उन्होंने कहा मैनहर्ट की जांच विजिलेंस कर चुकी है और उसे कोई आनियमितता नही मिली थी.
भाजपा को किसी भी जांच से कभी भी परहेज नहीं है बशर्ते वह निष्पक्ष. लेकिन जब पुरानी फाइलों की जांच हो रही है तो 2014 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए निर्देश के आलोक में झामुमो रिश्वत कांड की भी फाइल को दोबारा खोल कर जांच करवानी चाहिए.
झामुमो के महासचिव आधी अधूरी जानकारी लेकर बातों को रखते हैं. मैनहर्ट का मुद्दा पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल का था ही नहीं लेकिन उन्होंने इसे बाबूलाल के कार्यकाल का बता दिया. असल मे झारखंड विकास मोर्चा के भाजपा में विलय से झामुमो परेशान हो गया है और उसके नेता कुछ भी बोल दे रहे है.
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झामुमो रिश्वत कांड के अलावा ऐसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं है जब रिश्वत के 3 करोड़ रुपयों को पंजाब नेशनल बैंक के नई दिल्ली स्थित नरोरा ब्रांच में रखा गया हो. झामुमो को बताना चाहिए की घूस की राशि को लेकर जो उन्हें इनकम टैक्स जमा करने का नोटिस मिला था, उसके आलोक में इन्होंने घूस के पैसे पर अभी तक इनकम टैक्स दिया है या नहीं.
प्रतुल ने कहा झारखंड मुक्ति मोर्चा बाबूलाल को विधायकों का होल सेलर बताते समय यह भूल जाती है की भारतीय संसदीय इतिहास में हॉर्स ट्रेडिंग शब्द की शुरुवात ही झारखंड मुक्ति मोर्चा से हुई थी जब इसके 4 सांसदों ने कांग्रेस से पैसा लेकर सरकार बचाने के लिए वोट दिया था. खरीद-फरोख्त की राजनीति का तो झारखंड मुक्ति मोर्चा सुपर सेलर है.
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