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टिकट बंटवारे में BJP को भी करनी पड़ेगी मशक्कत, पहले चरण के 13 सीटों पर टिकट बांटना असान नहीं

by bnnbharat.com
November 5, 2019
in समाचार
टिकट बंटवारे में BJP को भी करनी पड़ेगी मशक्कत, पहले चरण के 13 सीटों पर टिकट बांटना असान नहीं

टिकट बंटवारे में BJP को भी करनी पड़ेगी मशक्कत, पहले चरण के 13 सीटों पर टिकट बांटना असान नहीं

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खास बातें:-

  • दूसरे दल से बीजेपी का दामन थामने वाले नेताओं के साथ पार्टी के पुराने नेताओं को एकजुट रखना भी है चुनौती

  • एक-एक सीट पर हैं दो से तीन हैवीवेट दावेदार, नजरअंदाज किए गए तो बीजेपी में भी मच सकती है भगदड़

  • गुमला से शिवशंकर उरांव पर सस्पेंस, अरूण उरांव पर दांव खेल सकती है बीजेपी

रांचीः पहले चरण के जिन 13 सीटों पर चुनाव होना है, उनमें बीजेपी को टिकट बांटने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी. साथ ही दूसरे दलों से बीजेपी का दामन थामने वाले नेताओं के साथ पार्टी के पुराने नेताओं को भी एकजुट रखना बीजेपी के लिए चुनौती होगी. अगर बीजेपी नेताओं को एकजुट नहीं कर पाई तो भगदड़ की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. पहले चरण के 13 सीटों में से 9 सीटें पलामू प्रमंडल की हैं. इसमें 8 सीटों पर एक से अधिक दावेदार हैं. कुछ सीटिंग एमएलए हैं तो कुछ चुनाव लड़ चुके हैं. कुछ दूसरे दलों को छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिए हैं.

बीजेपी के लिए कैसे टिकट बंटवारा है चुनौती

डालटनगंजः पिछले चुनाव में आलोक चौरसिया झाविमो के टिकट पर चुनाव जीते थे. लेकिन बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया. यहां पहले से पलामू चैंबर के अध्यक्ष आनंद शंकर, अविनाश देव व मनोज कुमार टिकट की आस में हैं. इन दोनों को नजरअंदाज कर आलोक चौरसिया को टिकट देना भाजपा के लिए चुनौती बन सकती है. साथ ही नेताओं को एकजुट भी रखना होगा.

गढ़वाः गढ़वा में भी बीजेपी के लिए टिकट बांटना चुनौती है. यहां सत्येंद्रनाथ तिवारी भाजपा से विधायक हैं. लेकिन राजद के गिरिनाथ सिंह ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है. गिरिनाथ सिंह के अलावा अलखनाथ पांडेय भी कद्दावर नेता हैं, जो टिकट की आस लगाए बैठे हैं. इन तीनों में से एक टिकट देना बीजेपी के लिए चुनौती बन गई है.

भवनाथपुरः 2014 के चुनाव में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए अनंत प्रताप देव ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे. लेकिन उन्हें नौजवान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष भानू प्रताप शाही से हार का सामना करना पड़ा. अब भानू प्रताप शाही अपनी पार्टी का विलय भाजपा में कर चुके हैं. ऐसे में बीजेपी को दोनों में से एक को चुनने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी.

हुसैनाबादः हुसैनाबाद के विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता ने टिकट की आस में आजसू का दामन थाम लिया है. अब यह सीट किसके खाते में जाएगी, अब तक इस पर सस्पेंस बरकरार है. वहीं बीजेपी के कामेश्वर कुशवाहा, प्रफ्फुल सिंह, विनोद सिंह ऐर कर्नल संजय सिंह ने टिकट की दावेदारी पेश की है. यहां भी टिकट बांटना बीजेपी के लिए आसान नहीं है.

विश्रामपुरः विश्रामपुर से बीजेपी के रामचंद्र चंद्रवंशी विधायक हैं. लेकिन वहां नरेंद्र सिंह, अजय दूबे और ब्रजेंद्र तिवारी भाजपा के हैवीवेट नेता हैं. इधर रामचंद्र चंद्रवंशी के टिकट पर सस्पेंस हैं, लेकिन इनके अलावा इन तीनों नेताओं में से एक को चुनना बीजेपी के लिए चुनौती होगी.

पांकीः पांकी से कांग्रेस के विट्टू सिंह विधायक हैं, लेकिन इस विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के चार दावेदार हैं. इसमें अमित तिवारी, अमित प्रकाश, लाल सूरज और शशिभूषण मेहता भी टिकट के प्रबल दावेदार हैं. हाल ही में शशिभूषण मेहता ने भाजपा का दामन थामा है. जबकि अमित तिवारी और लाल सूरज के बीजेपी परख चुकी है.

लातेहारः लातेहार में भी बीजेपी के लिए टिकट बांटना चुनौती है. वहां से झाविमो विधायक प्रकाश राम ने बीजेपी का दामन थाम लिया है. पिछली बार उन्होंने ब्रजमोहन राम को हराया था. इसके अलावा बैजनाथ राम भी ताल ठोंक रहे हैं.

छत्तरपुरः छत्तरपुर में बीजेपी विधायक राधाकृष्ण किशोर पर भी सस्पेंस हैं. वहां उनके सामने मनोज भुइंया और प्रभात भुइंया ने भी अपनी दावेदारी पेश कर दी है. ऐसे में बीजेपी के लिए टिकट बांटना आसान नहीं होगा.

गुमलाः गुमला में भाजपा विधायक शिवशंकर उरांव पर भी सस्पेंस हैं. वहां हाल ही में भाजपा का दामन थामने वाले पूर्व आईपीएस अरूण उरांव पर बीजेपी दांव खेल सकती है. इसके पीछे वजह बताई जा रही है कि लोकसभा चुनाव में शिवशंकर उरांव अपने विधानसभा चुनाव में पार्टी उम्मीदवार को बढ़त नहीं दिला पाए थे.

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