रांची: झारखंड में सत्ता से बेदखल हो चुकी भारतीय जनता पार्टी को लॉकडाउन की अवधि में भी जनमुद्दों से भटकते हुए जरूरतमंद तथा निर्धन परिवारों तक मदद पहुंचाने में लगे अधिकारियों का मनोबल गिराने के प्रयास में जुटी है.
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश की ओर से राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू के नाम एक ज्ञापन सौंप कर राज्य सरकार के पदाधिकारियों द्वारा लिये जा रहे निर्णय को गैर संवैधानिक बताया गया है, लेकिन सच्चाई है कि गोड्डा जिले के मेहरमा के जिस प्रखंड विकास पदाधिकारी के कार्यां पर भाजपा ने सवाल उठाये है, उन्होंने लॉकडाउन की अवधि में उपायुक्त के निर्देश पर जन वितरण प्रणाली व्यवस्था पर नजर रखने के लिए एक टॉस्क फोर्स का गठन किया, ताकि पीडीएस विक्रेताओं पर स्थानीय स्तर पर नजर रखी जा सके, लेकिन इस टॉस्क फोर्स पर सवाल उठे, तो 11 अप्रैल को ही जारी एक आदेश से इसे निरस्त भी कर दिया गया. लेकिन इसके बावजूद 17 अप्रैल को भाजपा ने राज्यपाल को पत्र लिखकर खत्म हो चुके मसले को लेकर राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की गयी है. इस तरह का प्रयास लॉकडाउन के दौरान अपने घर-परिवार को छोड़ कर जनसेवा और लोगों के कल्याण में जुटे अधिकारियों को प्रताड़ित करने की तरह है.
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गौरतलब है कि भाजपा की ओर से राज्यपाल को सौंपे गये ज्ञापन में कहा गया है कि कोरोना संकट के बीच देश व्यापी लॉकडाउन में झारखंड सरकार के पदाधिकारियों द्वारा लिए जा रहे असंवैधानिक निर्णय हैरान करने वाले हैं. पत्र में दावा किया गया है कि पदाधिकारियों के ऊपर राज्य के मंत्रीगण और सत्त्ताधारी गठबंधन दल के नेताओं के द्वारा गैर कानूनी दबाव बनाया जा रहा.
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