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BNN खास: ब्यूरोक्रेसी का हालः 20 साल में एक्शन, इमोशन, क्लाइमेक्स, ड्रामा, लॉबिंग सब कुछ

by bnnbharat.com
June 8, 2020
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BNN खास: ब्यूरोक्रेसी का हालः 20 साल में एक्शन, इमोशन, क्लाइमेक्स, ड्रामा, लॉबिंग सब कुछ

BNN खास: ब्यूरोक्रेसी का हालः 20 साल में एक्शन, इमोशन, क्लाइमेक्स, ड्रामा, लॉबिंग सब कुछ

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खास बातें: 

  • बर्खास्तगी व वीआरएस के साथ सरकार से भी उलझे

  • जांच के घेरे में रहे अपर मुख्य सचिव से लेकर डीसी रैंक तक के अफसर

रांची: झारखंड ब्यूरोक्रेसी में एक्शन, ड्रामा, इमोशन, क्लाइमेक्स के साथ सब कुछ है. यूं कहें कि कैडर का आईएएस महकमा भी विवादों से अछूता नहीं रहा है. कभी अपनों में उलझे तो कभी सरकार से भी ठनी. वहीं सरकार ने कई मामलों पर ब्यूरोक्रेसी पर शिकंजा भी कसा. राज्य गठन से लेकर अब तक कई सरकारों में मंत्रियों की भी शिकायत रही कि सचिव उनकी बातों को नहीं सुनते. कभी मंत्री और सचिव आमने-सामने हुए तो कभी विभागीय कार्यवाही के दायरे में आ गए. कई को जांच के बाद क्लीन चीट भी मिली. राज्य के एक वरीय आईएएस अफसर ने वीआरएस के लिए आवेदन भी दिया, लेकिन अंतिम समय में उन्होंने अपना आवेदन वापस ले लिया.

कैसा है एक्शन, क्लाइमेक्स, ड्रामा और लॉबिंग

उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त डॉ नितिन मदन कुलकर्णी और हजारीबाग के तत्कालीन डीसी मनीष रंजन के बीच भी विवाद रहा. मामला राजभवन तक पहुंचा. फिर हजारीबाग के तत्कालीन डीसी सुनील कुमार पर एनपीटीसी के अफसरों की पिटाई का आरोप लगा जिस पर विभागीय कार्यवाही भी चली. फिर वन भूमि से जुड़ा मामला भी आया. कोडरमा के तत्कालीन डीसी छवि रंजन पर पेड़ की कटाई का आरोप लगा.

दो अफसर अपने कैडर में वापस ही नहीं आए

राज्य की पहली महिला आईएएस अफसर ज्योत्सना वर्मा रे बर्खास्त तो हो गयीं. ज्योत्सना वर्मा रे 1992 बैच की आईएएस अफसर हैं. वह मनीला में विश्व बैंक में प्रतिनियुक्ति थीं. प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त होने के बाद भी वह वहीं बनी रहीं. इसी तरह वरीय आईएएस अफसर डॉ स्मिता चुग रिटायर हो गईं, पर वह झारखंड नहीं आई. अपर मुख्य सचिव रैंक के अफसर राजीव कुमार भी प्रतिनियुक्ति की अवधि खत्म होने के बाद भी दिल्ली में ही तैनात हैं. एक और अफसर बर्खास्तगी के बॉडर लाइन पर हैं. 2011 बैच के अफसर बाघमारे कृष्णा प्रसाद के खिलाफ डीम्ड रेजिगनेशन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है.

कई वरीय अफसर भी जांच के दायरे में आए

1990 बैच के अफसर आलोक गोयल पर वित्तीय अनियमितता की रिपोर्ट केंद्र को भेज गई. अपर मुख्य सचिव रैंक के अफसर अरूण कुमार सिंह पर देवघर जमीन घोटाला मामले में स्पष्टीकरण भी पूछा गया. एक साल से ड्यूटी से गायब रहने वाले आईएएस अफसर बाघमारे प्रसाद कृष्णा भी विभागीय कार्यवाही में दोषी पाये गये. अब उनके खिलाफ डीम्ड रेजिगनेशन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है. गैर सेवा से आईएएस बने मनोज कुमार जांच के दायरे में आए. इनके सीआर पर भी प्रतिकूल टिप्पणी की गई. 2003 से 2009 तक का सीआर एक ही बार दे दिया.

सरकार और आईएएस अफसरों के बीच भी ठनी

21 खनिज खदानों के रद्द करने के मामले में तत्कालीन खान सचिव एसके सत्पथी अड़े रहे. सीएमओ ने कई बार खदानों के लीज नवीनीकरण के लिये कमेटी बनायी. सभी ने रद्द करने की अनुशंसा की. इससे बाद फिर से खान विभाग पर समीक्षा के लिये दबाव बनाया गया. खान सचिव अड़े रहे और 18 खनिज खदानों की लीज रद्द करने की अनुशंसा कर दी.

पूर्व मंत्री रणधीर सिंह और कुलकर्णी हो गए आमने-सामने

मंत्रियों की भी आपत्ति रही कि सचिव उनकी बातों को नहीं सुनते हैं. कृषि मंत्री रणधीर सिंह और तत्कालीन कृषि सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी के बीच ठनी. कृषि की कई योजनाओं को जल्द से जल्द लागू कराने को लेकर दोनों के बीच नहीं बनी. इस कारण कुलकर्णी को बदल दिया गया.

पूर्व मंत्री चंद्रप्रकाश और एपी सिंह के बीच नहीं बनी

पूर्व पेयजल मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी और पूर्व पेयजल सचिव एपी सिंह के बीच ठनी रही. ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को लेकर मंत्री ने कई बार पीत पत्र भी लिखा. इसके बाद एपी सिंह को स्कूली शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया. फिलहाल एपी सिंह को वन विभाग की जिम्मेवारी सौंपी गई है.

अडानी पावर को लेकर सीएमओ और रहाटे आमने सामने

अडाणी पावर को बिजली देने के मामले में तत्कालीन ऊर्जा सचिव एसकेजी रहाटे और सीएमओ आमने-सामने हो गए. इसके बाद रहाटे एक माह की छुट्टी पर चले गए. फिर उन्हें ऊर्जा से हटाकर श्रम विभाग में तबादला कर दिया गया. श्रम विभाग से हटाकर उन्हें गृह विभाग की जिम्मेवारी सौंपी गई थी.

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