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BNN खास: संगठनों का विरोध नहीं आया काम, अब गेंद सरकार के पाले में

by bnnbharat.com
May 21, 2020
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BNN खास: संगठनों का विरोध नहीं आया काम, अब गेंद सरकार के पाले में

BNN खास: संगठनों का विरोध नहीं आया काम, अब गेंद सरकार के पाले में

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खास बातें:-

 

  • बिना पढ़ाये अभिभावकों से 400 करोड़ की वसूली

  • फीस नहीं लेने का चलाया गया कई बार अभियान

  • मौसमी कार्यक्रम बन गया है स्कूल प्रबंधन का विरोध

रांची: लॉकडाउन में स्कूल, कॉलेज सहित सभी शैक्षणिक संस्थाएं बंद हैं. विद्यार्थियों की पढ़ाई लगभग ठप है. ऑनलाइन पढ़ाई की औपचारिकताएं निभाई जा रही है. हालांकि स्कूाल प्रबंधन फीस में कम करने को तैयार नहीं है. इसके खिलाफ विभिन्न अभिभावक संगठन विरोध दर्ज कराते रहे. कई स्टेज पर ‘नो स्कूल, नो फीस’ का अभियान चलाया गया. हालांकि विरोध काम नहीं आया. अब गेंद सरकार के पाले में है.

पीएम से सीएम तक पहुंचाई आवाज

अभिभावक संघों द्वारा अभियान के तहत प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, झारखंड के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री तक बात पहुंचाई गई. सोशल मीडिया में ट्वीटर, फेसबुक सहित कई माध्यमों का उपयोग किया गया. इसके बाद भी किसी तरह का कोई रिस्पांस उच्च स्तर पर नहीं लिया गया.

मौसमी कार्यक्रम बना विरोध

अभिभावकों संघों की फीस और अन्य मदों में की जाने वाली बढ़ोत्तरी का विरोध मौसमी कार्यक्रम बन गया है. हर साल विभिन्न संगठनों द्वारा इसका विरोध किया जाता है. यह कवायद वर्षों से चल रही है. लॉकडाउन के कारण फिलहाल यह विरोध सोशल मीडिया के माध्यम से हो रहा है. अन्यथा धरना, प्रदर्शन और तालाबंदी तक की जाती है. हालांकि कहीं कोई असर नहीं पड़ता है.

हर सत्र में होती है बढ़ोत्तरी

स्कूल प्रबंधन हर साल अभिभावकों से बड़ी रकम विभिन्न मदों में वसूलते हैं. नये सत्र में इसमें बढ़ोत्तरी कर दी जाती है. रि एडमिशन के तौर पर अभिभावकों से कई स्कूल हर साल हजारों रुपये ऐठते हैं. बच्चों की किताब के नाम पर भी पैसा लिये जाते हैं. कई स्कूल प्रबंधन का किताबों के प्रकाशक से सांठगांठ रहती है.

करीब 400 करोड़ की वसूली

झारखंड में सीबीएसई से संबद्धता प्राप्त 620 स्कूल है. इन स्कूलों में वर्ग एक से 12वीं तक दो लाख बच्चे अध्ययन करते हैं. स्कूलों ने अभिभवकों से ट्यूशन और बस फीस लिया है. कई स्कूल प्रबंधन ने दो महीने की एकमुश्त फीस जमा कराई. बिना पढ़ाये अभिभावकों से करीब 400 करोड़ रुपये की वसूली की गई. औसतन 10 हजार रुपये विभिन्न मद में अभिभावकों से वसूले जा रहे हैं.

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