रांचीः झारखंड में मौजूद खनिज खदानों से खनन का काम धीमी गति से चल रहा है. वजह है कि राज्यभर में छोड़े बड़े खनिज खदानों से खनन का काम बाधित है. विभिन्न खनिज के लिए 3976 लीजधारकों को खनन के लिए खदानें आबंटित की गई थी. इसमें से 2915 लीजधारकों का काम बंद है. प्रदेश में सिर्फ 1061 लीजधारक ही खनन का काम कर रहे हैं.
कोल ब्लॉक के 110 लीजधारकों का भी काम बंद
झारखंड में कोल ब्लॉक के लिए 202 लीजधारकों को खदानें आबंटित की गई थीं. इसमें से 110 लीजधारकों का काम बंद है. इसमें सबसे अधिक धनबाद के 48 लीजधारकों का काम बंद है. धनबाद रिजन में 131, दुमका में 17, हजारीबाग में 38, कोल्हान में 01, पलामू में 04 और रांची रिजन में 11 लीजधारक हैं. इस तरह कोल ब्लॉक के लिए 202 लीजधारकों को खनन का काम मिला था. इसमें से 110 लीजधारकों का काम बंद है.
खान विभाग को लक्ष्य से 1115.82 करोड़ कम मिली रॉयल्टी
वित्तीय वर्ष 2018-19 में खान विभाग को निर्धारित लक्ष्य से कम रॉयल्टी मिली. खान विभाग ने 6431.50 करोड़ रॉयल्टी का लक्ष्य रखा था लेकिन इसके एवज में 5315.67 करोड़ ही रॉयल्टी मिल पाई. इस हिसाब से खान विभाग को निर्धारित लक्ष्य से 1115.82 करोड़ कम रॉयल्टी मिली है. 23 जिलों को रॉयल्टी हासिल करने के लिये जो लक्ष्य दिया गया था, इनमें से किसी भी जिले निर्धारित लक्ष्य को हासिल नहीं किया.
सिर्फ एक वित्तीय वर्ष में ही लक्ष्य से अधिक रॉयल्टी मिली
वित्तीय वर्ष 2012-13 में ही निर्धारित लक्ष्य से अधिक रॉयल्टी मिली. इस वित्तीय वर्ष में 2950 करोड़ का टारगेट था, इसके एवज में 3124.52 करोड़ रुपये की रॉयल्टी प्राप्त हुई. वित्तीय वर्ष 2011-12 में 2600 रॉयल्टी हासिल करने का लक्ष्य था, इसके एवज में 2580.84 करोड़ रॉयल्टी प्राप्त हुई. वित्तीय वर्ष 2013-14 में 3500 करोड़ लक्ष्य के विरुद्ध 3199.60 करोड़ की रॉयल्टी प्राप्त हुई. 2014-15 में 3500 करोड़ के विरुद्ध 3449.83 करोड़, 2015-16 में 5500 के विरुद्ध 4770.59 करोड़ रुपये ही रॉयल्टी मिली. 2016-17 में 7050.88 करोड़ के विरुद्ध 4120.05 करोड़ की रॉयल्टी प्राप्त हुई.

