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BNN खासः झारखंड हाईकोर्ट और आरएनआर कॉलोनी धुर्वा को इंवायरमेंटल क्लीयरेंस ही नहीं

by bnnbharat.com
October 10, 2019
in समाचार
BNN खासः झारखंड हाईकोर्ट और आरएनआर कॉलोनी धुर्वा को इंवायरमेंटल क्लीयरेंस ही नहीं
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दीपक/कर्मवीर,

रांचीः झारखंड हाईकोर्ट और आरएनआर कॉलोनी धुर्वा को अब तक इंवायरमेंटल क्लीयरेंस नहीं मिल पाया है. इसके लिए टर्म ऑफ रेफरेंस भवन निर्माण विभाग को उपलब्ध करा दिया गया है. दोनों परियोजनाओं का काम आर.के. कंस्ट्रक्शन को मिला हुआ है. 212 करोड़ की लागत से बन रहे आरएनआर कॉलोनी का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. कोर कैपिटल एरिया के कुटे गांव के 58 एकड़ जमीन में बनी कॉलोनी को लेकर राज्य सरकार ने 400 लाभुकों से 14 जनवरी 2020 के बाद गृह प्रवेश कराये जाने का वायदा किया है. कॉलोनी की सड़कें भी बना ली गयी हैं. वहीं स्कूल, सामुदायिक सुविधाएं और अन्य भी यहां बहाल की जायेंगी.

330 करोड़ की लागत से बन रहा हाईकोर्ट भवन

वहीं 330 करोड़ से अधिक की लागत से बन रहे झारखंड हाईकोर्ट के नये भवन का काम अक्तूबर 2018 से बंद है. इसके निर्माण का काफी काम बचा हुआ है. इसमें अंदर की सड़कें, स्ट्रीट लाइट, पार्किंग स्थल, टाइपिस्ट रूम और अन्य कार्य शामिल हैं. झारखंड सरकार ने कंस्ट्रक्शन कंपनी को अब तक दो बार से अधिक समय तक कार्य को पूरा करने का विस्तार भी दिया है. हाईकोर्ट की एक उच्च स्तरीय समिति भी निर्माण कार्य पर लगातार नजर रख रही है.

कैसे मिलता है इंवायरमेंटल क्लीयरेंस

बी कटेगरी के जितने भी प्रोजेक्ट हैं, उसका इंवायरमेंटल क्लीयरेंस सिया (State Level Environment Impact Assessment Authority) के रेकोमेंडेशन पर होता है. उसके लिए टॉर( टर्म ऑफ रेफरेंस) दिया जाता है. इसके तहत जो इंवायरमेंटर डैमेज हुआ है, उस डैमेज को फिर से सुधार के लिए प्रोजेक्ट बनाना होता है. इसके बाद ईआइए, ईएमपी और रिमेडेशियन प्लान बनाकर सिया को सौंपा जाता है. सिया इसे एसेस कर रिकोमेंड करती है.

क्या कहते हैं सिया के मेंबर सेक्रेट्री

सिया के मेंबर सेक्रेट्री कमलेश पांडेय ने कहा कि दोनों भवनों के निर्माण के लिए टॉर( टर्म ऑफ रेफरेंस) दिया गया है. इसकी प्रक्रिया पूरी की जा रही है. प्रक्रिया पूरी होने के बाद इंवायरमेंटल क्लीयरेंस मिलेगा.

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