आज भी जिंदा है मनवीय संवेदना, इलाज के कई मदादगार आये समाने
10 वर्षीय सिदियू देवगाम को दो बार आ चुका है परालाईसिस अटेक
बच्चे का सर पे स्ट्रोक्स, लंबी इलाज की जरूरत
रांचीः मानवीय संवेदना आज भी जिंदा है. जरूरतमंद की मदद के लिय लोग आगे आ ही जाते है. सिदियू का इलाज रांची के रिम्स में चल रहा है. उसकी उम्र 10 साल है. इस अनाथ सिदियू को दो बार परालाईसिस अटेक आ चुका है. सामाजिक कार्याकताओं के सहयोग से सिदियू का इलाज के लिए रांची रिम्स भेजा गया जहां बाल रोग विभाग में डॉ. वर्मा के देखा रेख में उपचार चल रहा है.
इलाज के दरौन कई महांगे जांच की आवश्यता हुई. रांची के युवा नेता राज उरांव की पहल पर ट्रस्ट डायग्नोस्टिक सेंटर रांची के संचालक अंशु सहाय ने सिदियू के वस्तु स्थिति को जानकर उक्त सेंटर में एमआरआई तथा अन्य जांच निःशुल्क किया.
सर पर स्ट्रोक्स, लंबी इलाज की जरूरत
सिदियू देवगम जब वह दो वर्ष का हुआ तब उसके पिता का साया उठ गया. अब उसे पिता का चेहरा भी याद नहीं. उनकी मां भी अपने पति के असमय चले जाने से मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहने लगी. सिदियू जहां जो कुछ मिलता उसे खाकर गुजर-बसर करने लगा.
सिदियू देवगम का मूल गांव चईबासा के बोडदोर है. उसकी इस अवस्था को देख गांव के ही नानिका पूर्ति जो में रहती है अपने साथ ले आई. बोकारो के आसस विद्यालय में नाम लिखा दिया और वह क्लास एक में पढ़ता है.
सिदियू की देख रेख कर रहे नानिका पूर्ति के अनुसार 4 दिन पूर्व घर के पास ही मैदान में अपने दोस्तों के साथ फुटबॉल खेल रहा था. अचानक चक्कर से आने के बाद बाएं साइड का हाथ, पैर और मुंह खिंचने लगा. आधे घंटे में दो बार प्रलाइसिस एटेक आया.
बोकारो के सदर अस्पताल ने उच्च स्तरीय जांच के लिए रिम्स भेज. रिम्स के डॉक्टरों का कहना है बच्चे का सर पे स्ट्रोक्स है और उसे लंबी इलाज की जरूरत है. बोकारो से रिम्स इलाज के लिये भेजने की पहल बोकारों के पुलिस इंस्पेक्टर राजीव कुमार वीर एवं मजदूर नेता राजकुमार गोराई, मूर्तिकार अनिल गोप, योगो पूर्ति, रंजीत कुमार ने किया.

