सुरूर रज़ा
रांची: कई बार आपने आसपास बम मिलने की खबर सुनी होगी. यह भी सुना होगा कि उसे निष्क्रिय कर दिया गया. जानमाल का नुकसान होने से बच गया. मौत के मुंह में जाकर जिंदगी बचाने का काम एक खास टीम करती है. उसे बम निरोधक दस्ता कहा जाता है.
मंसूबों को कर देता है तार-तार-
यह वह दस्ता है जो किसी भी आतंकवादी या नक्सलियों के मंसूबों को तार-तार कर देता है. जब कभी भी देश या शहर में कहीं भी बम मिलने की खबर होती है, तब यही दास्ता तुरंत वहां पर पहुंचकर बम को निष्क्रिय करने का काम करता है.
अपनी जान को जोखिम में डालकर भी यह लोगों की जान बचाते हैं. ये वे लोग हैं जिनके लिए देश की सुरक्षा सर्वोपरि है, चाहे इसके लिए उनकी जान ही क्यों नहीं चली जाए.
जोखिम भरा काम होता है-
किसी भी बम को निष्क्रिय करने का काम काफी जोखिम भरा और एडवेंचरस होता है. बम स्क्वायड से जुड़े लोग बतातें है कि उन्होंने यह काम देश की सुरक्षा के लिए चुना है. बम को निष्क्रिय करने की खास ट्रेनिंग उन्हें दी जाती है.
इस दौरान उन्हें बताया जाता है कि कौन सा बम किस तरह से फटेगा. जैसे बिना स्विच दबाए लाइट नहीं जलती है, वैसे ही बिना किसी भी रिएक्शन के कोई भी बम जल्दी नहीं फटता है.
ट्रेनिंग में इन सारी बातों को बारीकी से बताया जाता है. ट्रेनिंग की मियाद 6 सप्ताह से लेकर 8 सप्ताह तक होती है, जिसे एनएसजी मानेसर में दी जाती है. कई बार ट्रेनिंग के लिए विदेश भी भेजा जाता है.
टीम लीडर की भूमिका अहम-
बम स्क्वायड के टीम लीडर की भूमिका काफी अहम मानी जाती है. टीम लीडर को एक एडमिनिस्ट्रेटर के साथ-साथ बम टेक्नीशियन और मैनेजर का भी काम करना होता है.
टीम लीडर को इन बातों की जानकारी बारीकी से होती है, जिससे वह अपनी टीम को लीड करता है. टीम लीडर यह ध्यान देता है कि जितने भी लोग हैं, वे शिष्टाचार बनाए रखें.
सभी के बीच एक अनुशासन की लक्ष्मण रेखा बहुत जरूरी होती है. यही एक चीज है जो टीम मेंबर्स को काम करने के लिए प्रोत्साहित करती है.
जैकेट का होता है अहम रोल-
जब भी बम निष्क्रिय करने टीम जाती है, तब खास तौर के जैकेट को पहनती है. यह जैकेट मनोबल को बढ़ाने का काम करता है. बम निरोधक जवान जो जैकेट पहनकर बम को उठाता है, वह फायर प्रूफ और बुलेट प्रूफ होता है. उसके अंदर कील या अन्य धातु प्रवेश नहीं कर पाती है.
इसके ऊपर सिर की सुरक्षा को लेकर विशेष फायर प्रूफ हेलमेट पहनना पड़ता है. जैकेट में एक टेंपरेचर कंट्रोलर डिवाइस लगा रहता है. जैसे ही जवान ज्यादा गर्मी से परेशान हो जाता है, वह डिवाइस को कम या ज्यादा कर तापमान को मेंटेन कर लेता है.


