नई दिल्ली: भारत-चीन सीमा विवाद के हालिया तनाव के बाद से दोनों देशों के बीच बैठकों का सिलसिला लगातार जारी है. ऐसे में आज दोनों देशों की कूटनीतिक स्तर पर बैठक होनी है. भारत-चीन तनाव के बाद से ये चौथी बैठक होने जा रही है. बैठक से एक दिन पहले राजनयिकों के बीच समीक्षा करने हेतु एक अहम बैठक की गई.
भारत-चीन के बीच चौथी बैठक आज
सीमा विवाद से संबंधित इस मामले के जानकार लोगों का मानना है कि बैठक का केंद्र दोनों देशों के बीच जारी मदभेदों को समाप्त करना होगा. जिसके परिणामस्वरूप विघटन और डी-एस्केलेशन प्रक्रिया को रोक दिया गया है. वहीं कुछ लोगों का मामना है कि यह मामला लंबा खिच सकता है. दरअसल, इस मुद्दे पर भारत का मानना है कि चीनी पक्ष विवादित सीमा इलाकों से अपने सैनिकों को पूरी हटाने और तनाव करने के साथ-साथ सीमावर्ति इलाकों में शांति बहाल करने की दिशा में नई दिल्ली के साथ सहयोग करेगा.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कही ये बात
वहीं दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने एक ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि विमर्श एवं समन्वय कार्य तंत्र के ढांचे के तहत भारत और चीन के बीच कूटनीतिक स्तर की एक और दौर की वार्ता जल्द होने की उम्मीद है. घटनाक्रम से अवगत लोगों ने कहा कि इस कूटनीतिक वार्ता के शुक्रवार को होने की संभावना है और इसमें मुख्य ध्यान पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग सो तथा विवाद के कुछ अन्य बिन्दुओं से सैनिकों को तेजी से पीछे हटाने पर केंद्रित होगा.
इससे पहले 14 जुलाई को हुई थी बैठक
उन्होंने कहा कि 14 जुलाई को लगभग 15 घंटे तक चली कोर कमांडर स्तर की बैठक के बाद सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया उम्मीद के अनुरूप आगे नहीं बढ़ी है. उन्होंने कहा कि हमारे द्विपक्षीय संबंधो का आधार ही सामावर्ती इलाकों में शांति बनाए रखना है. श्रीवास्तव ने कहा क ‘हम यह भी स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत एलएसी की निगरानी और इसका सम्मान करने के प्रति पूरी तरह कटिबद्ध है और हम एलएसी पर यथास्थिति को बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास को स्वीकार नहीं करेंगे.’

