निजी हॉस्पिटल ने इलाज का खर्च बताया साठ हजार रुपये
डालसा PLV अनिता ने मामले को संज्ञान में लिया
अभिभावक ने डालसा से खर्च वहन करने की लगाई गुहार
रिम्स में दलाली में लिप्त डॉक्टरों पर डालसा करेगी कार्रवाई
रांची: झारखंड के सबसे बड़े हॉस्पिटल रिम्स में अब भी दलाल पूरी तरह से हावी हैं. इसका पोल तब खुला जब गरीब अभिभावक के नवजात बच्चे के इलाज के लिए पीजी के डॉक्टर ने अभिभावक को रिम्स में इलाज न कर निजी अस्पताल के चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी. उस चिकित्सक ने निजी अस्पताल के चिकित्सक का मोबाइल नंबर दिया और उनसे संपर्क करने की बात कही.

बता दें कि 30 सितंबर को एक गरीब दंपति के यहां एक बच्चे का जन्म हुआ. बच्चे को प्राइवेट पार्ट में ट्यूमर था, जिसके इलाज के लिए दंपति ने बच्चे को डॉ. बिरूआ के शैल्य वार्ड में भर्ती कराया.
भर्ती करने के बाद इलाज शुरू हुआ. फिर बीते 8 अक्टूबर को डॉ. विरूवा के वार्ड के पीजी डॉक्टर ने दंपति को निजी अस्पताल के एक चिकित्सक का मोबाइल नंबर दे दिया और कहा कि यहां रिम्स में इलाज में विलंब होगा, आप इस नंबर पर बात कर लीजिए वहां जल्दी इलाज हो जाएगा.

इसके बाद जब दंपति ने उस नंबर पर बात की तो उस अस्पताल में इलाज का खर्च 60 हजार बताया गया. जबकि दंपति के पास आयुष्मान कार्ड भी है. इसके बाद से निजी अस्पताल से उस व्यक्ति को लगातार फोन आने लगे.
परेशान होकर दंपति ने डालसा की पीएलवी अनिता देवी से संपर्क किया. जब इस मामले में अनिता देवी से BNN BHARAT ने बात की तो उन्होंने बताया कि एक मामला संज्ञान में आया है, जिसमें रिम्स के चिकित्सकों ने बच्चे को किसी निजी अस्पताल के एक चिकित्सक का नंबर देकर उसके पास जाने की सलाह दी थी.
इससे संबंधित दंपति का आवेदन भी प्राप्त हुआ है. इस तरह के मामले में लिप्त लोगों व चिकित्सकों पर कार्रवाई की जाएगी. आगे उन्होंने कहा कि अब बच्चे का खर्च के लिए दंपति ने डालसा से गुहार लगाई है. इसपर भी विचार किया जा रहा है. जितना संभव हो अभिभावक की मदद की जाएगी.
इस मामले में हमने रिम्स प्रबंधन से बात करने की कोशिश की लेकिन संपर्क नहीं हो पाया.

