दिल्ली: कोरोना वायरस महामारी के कारण ऑटोमोटिव इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है. ऐसे में इस बार इस सेक्टर से जुड़े लोगों और कंपनियों को आम बजट 2021-22 से काफी उम्मीदें हैं. 2020 के आम बजट में सीमित दायरे में इस सेक्टर को लाभ दिया गया था, लेकिन उसके तुरंत बाद ही कोरोना महामारी ने भारत सहित पूरी दुनिया को अपने चपेट में ले लिया. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोशिएशन (FADA) ने ऑटो सेक्टर की मदद के लिए बजट से पहले अपनी सिफारिशों को सामने रखा है.
ऑटोमोटिव सेक्टर को उम्मीद है कि इस बार के आम बजट में कॉर्पोरेट और सझेदारी फर्म्स के टैक्स में कटौती की जाएगी. पिछले बार के बजट में सरकार ने 400 करोड़ रुपये से कम टर्न ओवर करने वाली प्राइवेट कंपनियों के टैक्स में 25 प्रतिशत की कटौती की थी. फेडरेशन ने उम्मीद जताई है कि इसे मालिकाना और साझेदारी फर्म्स को भी इसका फायदा मिलेगा. ऑटो डीलरशिप का एक बड़ा वर्ग इस श्रेणी में आता है.
2020 के फाइनेंस बिल में ऑटो डीलर पर 0.1 प्रतिशत का टीसीएस लगाया गया था. जो कि 1 अक्तूबर 2020 से लागू है. फेडरेशन का मनाना है कि यह ऑटोमोबाइल सेक्टर पर एक भार है. और इसमें छूट मिलनी चाहिए.
ऑटो मोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के अध्यक्ष विंकेश गुलाटी ने कहा, ‘वित्त मंत्री पहले से इन्वेस्टर के विश्वास को बढ़ाने का इरादा व्यक्त कर चुकी हैं. आम बजट 2021 का फोकस कोरोना वायरस से प्रभावित भारतीय अर्थव्यवस्था को को मंदी से बचाने और खपत बढ़ाने पर केन्द्रित करना चाहिए. ऑटोमोबाइल सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बैरोमीटर है जो कि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएगा. ऑटोमोबाइल सेक्टर भारत की विकास का एक प्रमुख स्तम्भ है. यह सेक्टर 4.5 लाख लोगों को नौकरी प्रदान करता है. हम डिमांड आधारित बजट की उम्मीद कर रहे हैं.
फेडरेशन के इन सुझावों के अतिरिक्त ज्यादातर कार बनाने वाली कंपनियां रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन खर्च में कटौती की भी उम्मीद कर रही है. आकर्षक योजनाओं से बिक्री बढ़ने की उम्मीद है. जबकि विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए सरकार को इलेक्ट्रॉनिक और सेमी कंडक्टर में नई योजनाओं की शुरुआत करने की जरूरत है.

