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उपचुनाव: कांग्रेस के 22 विधायको के कमल थामने के बाद अब अग्नि परीक्षा की घड़ी

by bnnbharat.com
May 28, 2020
in Uncategorized
उपचुनाव: कांग्रेस के 22 विधायको के कमल थामने के बाद अब अग्नि परीक्षा की घड़ी
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सागर से विपिन दुबे,

भोपाल(MP): कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के छह मंत्रियों सहित 22 विधायकों के भाजपा में जाने से 15 साल बाद 15 महीने के लिए बनी मध्यप्रदेश की कांग्रेस की सरकार तो गिर गई, लेकिन आने वाले उपचुनाव में इन विधायकों को अपने विधानसभा क्षेत्र से बाजी मारना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है.

कहीं भितरघात का डर तो कहीं भाजपा के ही उस क्षेत्र के बड़े नेता इन्हें हजम नहीं कर पा रहे हैं. बुंदेलखंड अंचल के सागर जिले की सुरखी विधानसभा क्षेत्र हमेशा चर्चित रही है.

यहां कई बड़े नेताओं ने अपनी किस्मत आजमाई है, इस बार फिर प्रदेश में सागर की सुर्खी फिर सुर्खियों में है. यहां से कांग्रेस के विधायक गोविंद राजपूत इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए हैं.

यहां से भाजपा के कई कद्दावर नेता चुनाव लड़ने के इच्छुक है लेकिन गोविंद राजपूत के भाजपा में आने और यहां से उपचुनाव लड़ने से उन नेताओं के सपने टूट गए, ऐसे में आने वाले उपचुनाव में अपनों से खतरा कम नहीं है.

हालांकि कांग्रेस से भाजपा में आने वाले इन नेताओं का कहना है कांग्रेस मैं अपनी बात रखना मुश्किल था सुनने वाला कोई नहीं था, हमें जनता की फिक्र है, इसलिए विकास और जनता को ध्यान में रखकर हमने यह फैसला लिया है. गौरतलब है मध्य प्रदेश की राजनीति में तूफान आने के बाद भाजपा सरकार तो बन गई लेकिन मंत्रिमंडल अभी भी अधूरा है जिसमे सिर्फ पांच मंत्री ही है. जून के प्रथम सप्ताह में मंत्रिमंडल का विस्तार होना है.
सिंधिया खेमे के विधायकों को मंत्री बनाना और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपने विधायकों को भी जगह देना एक चुनौती बन गई है. गौरतलब है कांग्रेस आला कमान से लेकर सूबे के मुख्यमंत्री कमलनाथ तक अपना दर्द बांटने वाले सिंधिया खेमें के जब 22 विधायकों के सब का बांध टूट गया तो उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़कर कमल थाम लिया. नतीजा 15 साल बाद 15 महीने के लिए बनी कांग्रेस सरकार गिर गई.

हर विधायक का दर्द था- सोनिया से लेकर राहुल और कमलनाथ से लेकर राजनीति के चाणक्य दिग्विजय उनकी बात नहीं सुनते, आरोप था दिग्विजय ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को न जाने कौन सी दवा पिलाई की प्रदेश सरकार उनके हाथों कठपुतली बन गई. यह 22 विधायक जिनमें सरकार के 6 मंत्री शामिल थे वे नाराज होकर बेंगलुरु चले गए.

सरकार के सामने संकट के बादल छाए तो दिग्विजय राजा सहित उस समय मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ यही कहते रहे- हमारे विधायकों को बंधक बनाया गया है। बंदूक रखकर उनसे जबरजस्ती इस्तीफे लिखवा गए हैं. इसी बीच इन विधायकों के कुछ वीडियो वायरल हुए जिनमें उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा- हम नाराज होकर अपनी इच्छा से बेंगलुरु आए हैं.

हम सरकार का साथ छोड़ रहे हैं लेकिन इस तमाशे के बीच दिग्विजय की भोपाल से दिल्ली और कर्नाटक की सड़कों पर बाल हट तो देखिए वो हमेशा एक ही बात कहते रहे हमारे विधायकों की कनपटी पर बंदूक रखकर भाजपा यह नाटक कर रही है. हालांकि विधायकों के विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष ना आने से जनता मैं भी यही संदेश गया था, हो सकता है दिग्विजय सच हों, लेकिन उस घटनाक्रम के करीब 10 दिन बाद बेंगलुरु में ठहरे विधायक जब दिल्ली आए तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन्हें भगवा रंग मैं रंग दिया.

उस तस्वीर को देखकर दिग्विजय की बालहट का जवाब हर शख्स को मिल गया कि इन विधायकों को भाजपा से बंदूक का डर नहीं बल्कि भाजपा के वादों ने शायद उनका दिल जीत लिया.

शायद, गले में भगवा गमछा वाली इन 22 विधायकों की तस्वीर कह रही है – दिग्विजय तुम झूठे हो! हमारा दर्द समझ लिया होता तो हम बेंगलुरु जाते ही नहीं! बहरहाल आने वाले कुछ ही समय में प्रदेश के 24 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव है जिनमें बुंदेलखंड की इकलौती सुरखी विधानसभा है.
इसके अलावा सबसे ज्यादा ग्वालियर चंबल अंचल से 16 सीटों पर उप चुनाव होना है.

सुरखी विधानसभा क्षेत्र से अभी कांग्रेस से किसी प्रत्याशी के फाइनल नाम पर मुहर नहीं लगी है. बुंदेलखंड अंचल सहित प्रदेश के ऐसी टकराहट वाले क्षेत्रों से भाजपा की जीत सुनिश्चित कराने के लिए राजनीति के मजे खिलाड़ी प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री एवं वर्तमान में खुरई विधानसभा क्षेत्र से विधायक भूपेंद्र सिंह को कमान सौंपी जाती है.

भूपेंद्र सिंह को मिल सकती है प्रत्याशी के जीत की जवाबदारी

सागर में बात चाहे महापौर, जिला पंचायत, जनपद पंचायत अध्यक्ष की हो या आठों विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के मुकाबले विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी तय करने की बात हो भूपेंद्र सिंह से रायशुमारी जरूर की जाती है.

इस बार भी सुरखी विधानसभा क्षेत्र से गोविंद की जीत सुनिश्चित कराने के लिए भूपेंद्र सिंह को भाजपा की जीत की नैया पार लगाने की जिम्मेदारी मिल सकती है.

मालूम हो इस बार सांसद के चुनाव में कई दिग्गज आगे थे लेकिन भूपेंद्र सिंह ने जिस नाम को आगे बढ़ाया उसकी जीत की जवाबदारी की शिद्दत से निभाई.

 

 

 

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