रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने कहा है कि पेट्रोल पर दस रुपये और डीजल पर तेरह रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क बढ़ाकर केंद्र सरकार ने एक बार फिर देशवासियों को छलने का काम किया है.
उन्होंने कहा कि वैश्विक कोरोना महामारी के वक्त केंद्र सरकार एक ओर प्रधानमंत्री जनकल्याण योजना के नाम पर कुछ सहायता उपलब्ध कर झूठी वाहवाही लूटने की कोशिश रही है, वहीं दूसरी तरफ डीजल-पेट्रोल पर एक साथ क्रमशः 13 और 10 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क में बढ़ोत्तरी की है, संभवतः देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के इतिहास में यह पहला मौका होगा, जब एक बार में उत्पाद शुल्क में इतनी जबर्दस्त बढ़ोत्तरी की गयी है.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता ने यूपीए शासनकाल में जब दुनिया भर में पेट्रोलियम उत्पाद की कीमत आसमान छू रही थी, उस वक्त भी केंद्र सरकार ने किसानों और आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने की कोशिश की थी, इसके बावजूद तब भाजपा के तमाम छोटे-बड़े नेता पेट्रोलियम पदार्थां की कीमत को लेकर हायतौबा मचा रहे थे, लेकिन आज जब पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमत में गिरावट दर्ज की गयी है और अमेरिकी बाजार में पेट्रोलियम पदार्थां की कीमत माइंस में चली गयी है, इस दौरान पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा लगातार स्टॉक को एकत्रित किया जा रहा है, लेकिन केंद्र सरकार राहत देने के बजाय जनता के पॉकेट से पैसे निकालने में जुटी है.
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र की एनडीए सरकार बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों और पूंजीपतियों को उद्योग को बढ़ावा देने के नाम पर डीजल की कीमत में छूट दे रही है, वहीं कृषि पर पूरी तरह से निर्भर रहने वाली देश की बढ़ी आबादी से डीजल पर प्रति लीटर लगभग दोगुनी कीमत वसूली जा रही है. उन्होंने कहा कि देश के किसान ऐसे ही लॉकडाउन के कारण उत्पन्न स्थिति से परेशान है और कृषि उपज का लागत बढ़ती जा रहा है, वहीं फसल की अच्छी कीमत भी नहीं मिल पा रही है. ऐसी स्थिति में डीजल पर उत्पाद शुल्क में कमी कर केंद्र सरकार किसानों के अलावा यात्री एवं मालवाहक वाहनों को बड़ी राहत दे सकती थी, लेकिन ऐसा करने की जगह केंद्र सरकार ने जनविरोधी काम किया है.
उन्होंने बताया कि अभी कोरोना संकट के कारण सोशल डिस्टेसिंग का पालन आवश्यक है. ग्रीन जोन, ऑरेंज जोन में वाहनों के परिचालन में भी आंशिक छूट दी गयी है, लेकिन सोशल डिस्टेस्टिंग का पालन करने के कारण यात्री बस संचालकों को वाहन पर कम यात्रियों को बैठाना पड़ रहा है, यदि डीजल की कीमत में कुछ कमी होती, तो निश्चित रूप से यात्री बस संचालकों के साथ आम यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलती.

