रांची: मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा स्कूल खोलने के मुद्दे पर मांगे गए सुझाव पर झारखंड पैरेंट्स एसोसिएशन ने अपना सुझाव दिया.
उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य सहित देश स्तर पर कोरोना संक्रमण की लगातार बढ़ती संख्या और प्रभावित होते लोगों को देखते हुए स्कूल खोले जाने की कल्पना कर पाना काफी मुश्किल प्रतीत होता है.
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर स्पष्ट मानना है कि स्कूलों के खुलने पर यह सुरक्षित दूरी बनीं नहीं रह सकती है. जिसके कारण हमारे बच्चों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा. जीवन की शर्त पर अपने बच्चों को स्कूलों में ‘कोरोना के साथ’ पढ़ने के लिए नहीं भेज सकते है.
स्कूलों में बच्चों के आने के बाद, उनके बीच सोशल/फिजिकल दूरी को बनाये रखने के लिए किये जाने वाले हर तरह के प्रयास (यहां तक कि मनोवैज्ञानिक तौर पर उपलब्ध होने वाला सहयोग भी) अपने अंतिम परिणाम में स्कूल को एक ‘जेल’ में ही बदलने वाले साबित होंगे.
अपने स्कूल में ही छात्र अपने साथियों से नैसर्गिक-सहज व्यवहार न करने के लिए बुरी तरह मजबूर होगा. स्कूल में एक रोबोट की तरह व्यवहार करने के बाद भी हमारे बच्चे कोरोना के खतरे से बच नहीं सकते हैं.
इस संबंध में डब्ल्यूएचओ का रिपोर्ट भी देखा जा सकता है कि संक्रमण किस तरीके से बढ़ रहा है और आगे अक्टूबर-नवंबर तक इसके के हालात क्या होंगे. इसलिए जब तक हालात सामान्य नहीं होते और जब तक वैक्सीन आ नहीं जाता तब तक स्कूल ना खोले जाए.
साथ ही 2020- 2021 सत्र को जीरो ईयर घोसित कर बच्चों को अगली क्लास में प्रमोट किया जाये. साथ ही इस पूरे सत्र में स्कूलों की ऑनलाइन पढ़ाई बंद कराकर एम .एच .आर .डी द्वारा चैनल के माध्यम से जो क्लास 1 से 12 तक की क्लास की पढ़ाई जो शुरू कराई गई है, उसमें सीबीएसई /आईसीएसई/ स्टेट बोर्ड के लिए स्लॉट निर्धारित व तैयार कर पढ़ाई सुरु कराई जाए ताकि इसका लाभ बच्चों को हो.

