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वनौषधि

शरीफा के फायदे : वनौषधि – 47

प्रचलित नाम- शरीफाप्रयोज्य अंग-मूल, पत्र, फल एवं बीज। स्वरूप-लघु वृक्ष, पुष्प काष्टीय शाखाओं पर उत्पन्न होते हैं, जंगल में प्राकृतिक रूप से उगते हुए पाये जाते हैं। पुष्प हरित-श्वेत, पंखुड़ियाँ मांसल, फल हरे-पीले समूह मेंस्वाद-

बड़ी अजवायन के हैं बड़े फायदे : वनौषधि – 46

प्रचलित नाम- बड़ी अजवायनप्रयोज्य अंग- मूल एवं फल स्वरूप एक वर्षायु गुल्म, 2-3 फूट ऊँचा;पत्ते गहराई तक कटे हुए,पुष्प सफेद छोटे छोटे छत्रों में,फल अंडाकार पीत वर्णी।स्वाद-सुगंधित-कटु ।रासायनिक संगठन- इसमें एक उड़नशील तेल हल्के पीले रंग का

कदम सर्पदंश मे भी है उपयोगी, जानिए इसके गुण : वनौषधि – 45

प्रचलित नाम- कदमप्रयोज्य अंग-मूल, कांड की छाल, पत्र, पुष्प तथा फल । स्वरूप-विशाल कद के वृक्ष, पत्ते अभिमुखी तथा उपपत्र युक्त, पुष्प सुगंधित, गोल मुंडक में होते हैं। स्वाद - तिक्त कषाय । रासायनिक संगठन-इसके पत्रों में एल्कालॉयड्स

कालमेघ एक रामवाण औषधि : वनौषधि – 44

प्रचलित नाम- कालमेघ, चिरायता प्रयोज्य अंग-पंचांग, पत्र एवं मूल ।स्वरूप - एक वर्षायु उन्नत शाखीत गुल्म, कांड चतुष्कोणक, पत्ते अभिमुखी, पुष्प श्वेत, पंखुड़ियों के ऊपर बैंगनी रंग के धब्बे होते हैं।स्वाद- तिक्त । रासायनिक संगठन-इस

जानिए रक्तपुष्पी के औषधीय गुण: वनौषधि – 43

प्रचलित नाम- काकांगी, अंत्रमूल, रक्तपुष्पी, काकनासा, काक तुण्डी।प्रयोज्य अंग- पंचांग, मूल, पत्र एवं पुष्प ।स्वरूप-छोटी चिरस्थायी गुल्म, लघु दुग्ध रस युक्त, पुष्प पीले-नारंगी रंग के होते हैं।स्वाद- तिक्त । रासायनिक संगठन-इसके पत्रों

जानिए कटहल के औषधीय गुण : वनौषधि -42

प्रचलित नाम- कटहलप्रयोज्य अंग- मूल, छाल, पत्र एवं फल ।स्वरूप- विशाल सदा हरति वृक्ष जो 30-40 मीटर ऊँचा;छाल खुरदरी, दुग्धमय क्षीर,फल एवं पुष्प मोटी काष्ठीय शाखाओं पर लगते हैं, जो पीतवर्णी, फल बड़े-बड़े कोमल काँटों युक्त ।स्वाद- कटु ।

दमनक या दौना बच्चों के लिये एक दिव्य औषधि : वनौषधि – 41

प्रचलित नाम- दवना/दौना प्रयोज्य अंग- पंचांग । स्वरूप-गुल्म जैसा लम्बा सुगंधित क्षुप, आधे से ढाई मीटर ऊँचे, पत्ते लम्बे पतले एवं खंडित होते हैं। स्वाद - तिक्त । रासायनिक संगठन इस वनस्पति में - कार्बोदित,

श्वेतमुशली/तालमूली, वनौषधि – 40

प्रचलित नाम- सफेद मुशली/खैरूव।प्रयोज्य अंग- रसदार मूल एवं पत्राभास कांड।स्वरूप- विशाल कंटकीय लता, शाखाएँ झुकी हुई धारदार, कंटक 1-2से 3-4 इंच लम्बे पत्ते सदृश शाखाएँ जो 6-20के झुमके में होती है।स्वाद - मधुर । रासायनिक संगठन-इसके रस युक्त

सतावर औषधि के प्रयोग : वनौषधि – 39

प्रचलित नाम- सतमूली/सतावर प्रयोज्य अंग- कंद सदृश रस युक्त मूल तथा पत्राभास कांड। स्वरूप- विशाल घनी, अतिशाखीत, पत्र रहित, कंटकयुक्त लता तथा पत्र सदृश्य शाखाएँ, पुष्प सफेद छोटे होते हैं। स्वाद - मधुर । रासायनिक संगठन-इसके रस

तालमखाना जिसे इक्षुगंधा भी कहते हैं, जानिए इसके औषधीय गुण : वनौषधि – 38

प्रचलित नाम- तालमखाना, कोकिलाक्ष, इक्षुगंधा। प्रयोज्य अंग- मूल, पत्र, बीज।स्वरूप- एक छोटा कंटक युक्त क्षुप जो नमी वाले स्थानों पर उगता है। कंटक पीले, प्रतयेक पर्व पर 6-6 की संख्या में, पत्ते 6-6 के चक्र में,पुष्प नीले बैंगनी रंग के होते