क्या आप जानते हैं ?

सत्यानाशी 14 दिनों में दूर करता है नपुंसकता : वनौषधि – 51

प्रचलित नाम-पीलाधतूरा, सत्यानाशी, कटुपर्णी, सुवर्णक्षीरी। प्रयोज्य अंग-मूल एवं पीतक्षीर स्वरूप-कंटकी गुल्म, फैली हुई शाखाएँ, पत्ते कंटकयुक्त एवं भिन्न वर्णी; पुष्प पीतवर्णी ।स्वाद तिक्त । रासायनिक संगठन-इसके मूल में- बर्बेरिन, प्रोटापाइन नाईट्रेट, वसा अम्ल, सेरिल एल्कोहल एलोक्रिप्टोपाईन, इसके पुष्पों में टैनिन,...

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लक्ष्मणा को पुत्र देने वाला औषधि बताया गया है: वनौषधि – 48

प्रचलित नाम- लक्ष्मणा, जिन्सेंग प्रयोज्य अंग- मूल एवं पंचांग ।स्वरूप-लघु उपक्षुप, पत्र भिन्न वर्णी ।स्वाद- तिक्त ।रासायनिक संगठन-इस वनस्पति में पिमारा 8, ओइक अम्ल, नेनॉन, पेट्रोसेलीनीक अम्ल, एरेलोसाइड ए एवं बी, स्टीग्मान्स्टीरॉल एवं बीटा सिटोस्टीरॉल पाये जाते हैं।गुण- तिक्त एवं...

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दांतों के लिए वरदान है पीतवर्णी या सैरेयक : वनौषधि – 33

प्रचलित नाम- कट सरैया/पीला वासाप्रयोज्य अंग- मूल एवं पत्र । स्वरूप- लघु क्षुप, अतिशाखीत तथा कंटक युक्त पुष्प पीतवर्णी ।श्वेतपुष्प-सहचरपीतपुष्प-कुंटकरक्तपुष्प-कुरबकनीलपुष्प-दासी, वाण स्वाद- तिक्त । रासायनिक संगठन- इस वनस्पति में बीटा सिटोस्टीरॉल, स्कूटेलॉरिन 7-2रहामनोसिल ग्लूकोसाईड, इरीडोइड्स बारलेरिन एवं एसी बारलेरिन इसके...

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शरद पूर्णिमा 2022: इस वर्ष 9 अक्टूबर रविवार को है शरद पूर्णिमा, जानिए शुभ मुहूर्त और व्रत का महत्व

सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। वहीं शरद ऋतु के प्रारंभ की अनुभूति शरद पूर्णिमा के दिन से होती है। शारदीय नवरात्रि के बाद पड़ने वाली पहली पूर्णिमा को ही शरद पूर्णिमा कहते हैं। मान्यता है कि...

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जानिएशरद पूर्णिमा के दिन खीर खाने के 5 कारण

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्र की रोशनी मे खीर रख कर खाने की विशेष परंपरा है । आखिर इस दिन हम खीर क्यों खाते हैं? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण और रहस्य। चंद्र से बरसता है अमृत : कहते हैं...

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शरद पूर्णिमा को इस तरीके से खीर बनाकर खाने से मिलती है असाध्य रोगों से मुक्ति

शरद पूर्णिमा के महत्व से हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं लेकिन इस दिन खीर किस तरह से बनाकर कैसे खाना चाहिए यह शायद ही कोई जानता हो। इस दिन कोई खिचड़ी तो कोई खीर बनाकर कहा लेते हैं...

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14 सितंबर को मनाते हैं हिंदी दिवस, जानिए इतिहास और महत्व

BNNBHARAT: हर साल हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता है.  इस दिन ही देवनागरी लिपि में हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया गया था. साल 1953 में पहली बार हिंदी दिवस का आयोजन हुआ था. तभी...

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जानिए भगवान परशुराम का जन्म कब और कहां हुआ था, क्या-क्या है मान्यताएं… वे आज भी जीवित हैं – भाग -3 (भगवान परशुराम)

मुंबई: भगवान परशुराम किसी समाज विशेष के आदर्श नहीं है. वे संपूर्ण हिन्दू समाज के हैं और वे चिरंजीवी हैं. फिर भी ब्राह्मणों का एक वर्ग "जिसे जमींदार ब्राह्मण कहा जाता है " अपना आदर्श भगवान परशुराम को मानते है....

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अंग्रेजों के खिलाफ पहला विद्रोह 1750 में तिलका मांझी ने किया था

आजादी के रणबांकुरों की लड़ाई और प्रथम स्वाधीनता संग्राम की बात करें तो हमारे जेहन 1857 का गदर, रानी लक्ष्मीबाई, मंगल पांडे और तात्याटोपे का बलिदान आकार लेने लगता है. लेकिन भारत भूमि के इस पावन माटी से अंग्रेजों को...

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प्रेरणास्रोत: ऐसी प्रबल इच्छाशक्ति जिसनें एक कुली को बना दिया आईएएस अफसर

  नई दिल्ली. दुनिया में मेहनत और इच्छाशक्ति से बड़ा कुछ भी नहीं है. अगर इंसान कुछ करने की ठान ले तो उसे कोई नहीं रोक सकता. सिविल सेवा की परीक्षा पास करने के लिए लोग मेहनत और लगन के...

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