kavya rachna

“मैं अंग हूं”: ऋषि के तप और गणिका के सौंदर्य के बीच छिड़ा था संग्राम

यही मौका था योग पर भोग की एक और चोट करने का. आनंदातिरेक में डूबे श्रृंगी कह बैठे ' तुम्हारे पैरों से स्वर निकल रहे है' आश्रम के बाहर तो सबकुछ सामान्य-सामान्य था, लेकिन अंदर गणिका और ऋषि के बीच...

मैं अंग हूं: गणिका का वह संपूर्ण श्रृंगार सिर्फ ऋषि के नाम था

BNN DESK: जब तक गणिका की नौका लक्ष्य तक पहुंची, पहले से पहुंचे गुप्तचर ऋषि विभांडक की दिनचर्या का पता लगा चुके थे. सूचना के मुताबिक ऋषि विभांडक प्रायः आश्रम में ही रहते थे. हां, सप्ताह में एकाध बार अपने...

मैं अंग हूं : मेरी ‘मालिनी’ बचपन से ही मुझे बड़ी प्रिय थी

सदानीरा से मैंने एक साथ दो उपदेश ग्रहण किए. एक, शत्रु पर विजय पाने के लिए बरसात की उफनती गंगा बन जाना और दो, शासन तंत्र चलाने के लिए शरद, हेमंत और शिशिर ऋतुओं वाली उसकी धीरता - गंभीरता ओढ़...

सत्य के उत्तर काल में जब झूठ, सच पर इस कदर हावी हो गया कि सच और झूठ का हर अन्तर समाप्त हो चुका है

सत्य के उत्तर काल में जब झूठ, सच पर इस कदर हावी हो गया कि सच और झूठ का हर अन्तर समाप्त हो चुका है। और हर भक्त अपने ही बुने भँवर जाल में फ़ँस कर बिल्कुल कन्फ्यूज़्ड हो चुका...

जब भी मेरा किरदार बताया जाएगादावा है, वो असरदार बताया जाएगा

जब  भी  मेरा किरदार  बताया   जाएगादावा  है, वो  असरदार  बताया   जाएगा मैंने   बचाया   है   कविताओं को मरने सेमुझे सभ्यता  का पहरेदार बताया जाएगा मैंने  बोए  हैं  कितने  ही   अनकहे  अहसासमुझे नई फसलों का जमींदार बताया जाएगा जितना भी पाया, अपनी...

करो निज जीवन का बलिदान

करो निज जीवन का बलिदान जन्मभूमि के लिए करो निज जीवन का बलिदान जागो वीरो ! तुम्हें जगाता वयोवृद्ध हिमवान् ।। नहीं अर्चना की यह वेला , छोड़ो भोग - विलास , प्रलय मचाने को उद्यत है , डोल रहा...

——-प्लास्टिक—-

-------प्लास्टिक---- जगते प्लास्टिक सोते प्लास्टिक। दिन में प्लास्टिक रात में प्लास्टिक। जहर फैला रही है प्लास्टिक। धुंआ धुंआ बिखरा रही है। धुआंधार प्लास्टिक। जीते प्लास्टिक मरते प्लास्टिक। सांसे रोक रही है प्लास्टिक मरती है ना गलती है पर असर दिखा...

“दुआ करता हूं”

“दुआ करता हूं” तिरंगा ओढ़ कर आए कजा, ................ दुआ करता हूं, हर किसी की हो, बस यही रजा, ................ दुआ करता हूं, शान से आए जब वो, जन्नत जाने का दिन, हरे कफ़न पर बस रंग गेरुआ पड़ा रहे,...

“सैनिक की अभिलाषा”

“सैनिक की अभिलाषा” साथी कदम मिला लेना, ओ! साथी कदम मिला लेना। हो पंथ कठिन जब राह जटिल, हो दिखने में मंजिल धूमिल, भर ह्रदय साहस दिल में अटूट, जब निकलूँ शत्रु पराजय को रण में, तब साथी कदम मिला...

“अर्थव्यवस्था हालत खस्ता”

अर्थव्यवस्था हालत खस्ता हम सब आज व्यथित है देश की लाचारी से। पूरा विश्व उलझ गया है कोरोना महामारी से। देश की हालत खस्ता आज डूबी अर्थव्यवस्था कारोबार सब ठप्प हुए कैसे हो घर की व्यवस्था बना चीन चालाक उलझा...

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